संवाददाता सुनील खोडे
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पेटलावद l जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बोडायता एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला विधायक निधि से ग्राम पंचायत को प्राप्त हुए बर्तनों से जुड़ा हुआ है। ग्राम के युवक एवं शिकायतकर्ता करण गरवाल ने पंचायत के सरपंच दिनेश गणावा एवं रोजगार सहायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि विधायक निधि से आए बर्तनों का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है और उक्त सामग्री पंचायत के नियंत्रण से बाहर रखी गई है।

करण गरवाल ने मीडिया के सामने ऑन-कैमरा बयान देते हुए कहा कि विधायक निधि से ग्राम पंचायत को बड़ी मात्रा में बर्तन उपलब्ध कराए गए थे ताकि गांव के जरूरतमंद लोग सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों में उनका उपयोग कर सकें। लेकिन पंचायत स्तर पर इन बर्तनों की उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस संबंध में उन्होंने पूर्व में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को भी शिकायत की थी और मामले की जांच की मांग की थी। बावजूद इसके आज तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि विधायक निधि से प्राप्त बर्तन कहां रखे गए हैं और उनका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। गौरतलब है कि दिनेश गणावा वर्तमान में ग्राम पंचायत बोडायता के सरपंच होने के साथ-साथ सरपंच संघ के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में उन पर लग रहे आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा छेड़ दी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पंचायत की संपत्ति वास्तव में पंचायत के नियंत्रण में है तो उसका पूरा रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

साथ ही ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि सरपंच दिनेश गणावा स्थानीय भाजपा संगठन के कुछ पदाधिकारियों व मंडल अध्य्क्ष के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में विरोधी पक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या इसी कारण शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है? बोडायता ग्राम पंचायत पूर्व में भी विभिन्न निर्माण कार्यों, विकास योजनाओं और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रही है। अब विधायक निधि से आए बर्तनों को लेकर सामने आए आरोपों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के बाद ही होगा सच सामने
फिलहाल आरोप शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। मामले की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विधायक निधि से प्राप्त बर्तनों का वास्तविक उपयोग क्या हुआ और पंचायत की संपत्ति का सही तरीके से संरक्षण किया गया या नहीं।