संवाददाता सुनील खोडे
पेटलावद। ग्राम पंचायत बोडायता में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। पंचायत के कार्यों को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले युवक करण गरवाल के बदले हुए रुख ने ग्रामीणों के बीच नई चर्चा को जन्म दे दिया है। जिस करण गरवाल ने कुछ समय पहले पंचायत में भ्रष्टाचार, विकास कार्यों में गड़बड़ी और शासकीय राशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायतें की थीं, वही अब पंचायत के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहा है। और पंचायत को दूध का धुला बता रहा है। शिकायत के नाम पर लगता है करण गरवाल ने अपना उल्लू सीधा कर लिया है।
ग्राम पंचायत बोडायता के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने वाले करण गरवाल ने कई शिकायती की थी। जिसमे पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच की मांग की थी। लेकिन अब उनके बदले हुए रवैये को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति बनी कि पंचायत पर गंभीर आरोप लगाने वाले शिकायतकर्ता ने अचानक अपना रुख बदल लिया। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें सही थीं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि शिकायतें गलत थीं तो फिर उन्हें सार्वजनिक रूप से क्यों उठाया गया था।

ओर अगर पंचायत की शिकायत गलत हुई है तो झूठी शिकायत करने वाले कथित फर्जी शिकायतकर्ता करण गरवाल पर एफआईआर दर्ज की जाना चाहिए। ओर अगर शिकायत सही है तो आखिर क्यों करण गरवाल ने पलटी मार ली इसकी भी जांच होना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद गांव में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं शिकायतकर्ताओं को समझौते या साठगांठ के माध्यम से शांत तो नहीं किया जा रहा है। क्योकि सरपँच दिनेश गणावा ने पत्रकारों को भी सेट करने का भरपूर प्रयास किया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों पर हमेशा के लिए पर्दा पड़ सकता है। वहीं कुछ ग्रामीणों ने वर्तमान सरपंच दिनेश गणावा के कार्यकाल के साथ-साथ पूर्व सरपंच रहे उनके माता-पिता के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और खर्च की भी जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पंचायत में वर्षों से हुए सभी निर्माण कार्यों, भुगतान और शासकीय योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।