झाबुआ | युगप्रधान आचार्य पन्यास प्रवर चंद्रशेखर विजय जी के शिष्य आचार्य महाबोधि सूरीश्वर जी का पांच साधु भगवंतों के साथ मंगलवार शाम को कालीदेवी से विहार कर स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में मंगल प्रवेश हुआ। बावन जिनालय की पुण्य धरा पर तीन दिनों तक धर्मगंगा प्रवाहित होगी। विशेष प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत रात्रि प्रवचन 29 जनवरी तक शाम को भाइयों के लिए आयोजित होंगे।

वहीं 30 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह सवा 9 से साढ़े 10 बजे तक उपाश्रय में अहो जिनशासनम् विषय पर विशेष प्रवचन होंगे। आचार्य श्री ने श्री संघ झाबुआ की विनंती स्वीकार करते हुए 30 जनवरी तक स्थिरता का लाभ प्रदान किया है। इस दौरान बुधवार सुबह सवा 9 बजे बावन जिनालय के पौषध भवन में धर्म सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान आचार्य महाबोधि ने अहो जिनशासनम, नमोजिनशासनम के अंतर्गत कहा कि मां-बाप को भगवान की उपाधि से सम्मानित किया जाना है। जिनशासन की आत्माओं को अपने मार्ग से भटकने के सुनियोजित षड्यंत्र किया जा रहा है, जो हमको मोबाइल, टीवी के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।

मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की भावना को हमें आगे बढ़ाना है। हमें लोकोत्तर देवाधिदेव के जिन मंदिर, जिन तीर्थ प्राप्त हुए हैं। हमें लोकोत्तर मंत्र की प्राप्त हुआ है। जिसे हम नमस्कार महामंत्र के रूप में जानते हैं। हेमचंद्राचार्य सूरीश्वर जी ने आज के लिए करीब 900 वर्ष पूर्व कहा था कि वर्तमान में हम समय का सदुपयोग नहीं कर रहे हैं। आचार्य भगवंत कुछ ही सेकंड में 8 से 9 शोक की रचना कर लेते थे। हमें धार्मिक यात्रा करना है तो जीवों की विराधना से बच कर ही करना है। जिन शासन की आत्मा में रहकर ही ओगे बढ़ना है।

मीडिया प्रभारी रिंकू रुनवाल ने बताया कि धर्म सभा में हमीरमल कासवा, अशोक कटारिया, अंतिम जैन, नरेंद्र पगारिया, राजेश मेहता, अनिल रुनवाल, मनोज जैन, इंदरमल संघवी, हस्तीमल संघवी, सुरेश काठी, सुनील संघवी, निखिल भंडारी, अंकित कटारिया, शरद जैन, डॉ. पुनीत सकलेचा, समरथमल छाजेड़ सहित बड़ी संख्या में श्रावक– श्राविकाएं मौजूद रहे। श्रावक वर्ग के लिए शाम को भी प्रवचन का दौर चल रहा है।