सुरेश चन्द्र परिहार सारंगी।
इस कहते हैं आप ने क्या पाया और क्या खोया आज के समय में अपनों के चलें जाने पर भी दुःख प्रकट नहीं कर सकते हैं वहीं सारंगी के राजा साहब के अंतिम यात्रा पर चले जाने पर पुरा नगर व आस पास के ग्रामीण भी शोक में डुब गए, ओर हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई हों,अपने सादगी पुर्ण व्यवहार और हर एक से स्नेह के चलते वे जनता में लाड़ले थे उन्होंने कभी उच निच या पद को महत्व नहीं दिया एक सादे व्यक्तित्व के कारण वे पुरे नगर के लिए हर एक के साथ उठना बैठना रखतें थे और इसी लिए वे लोकप्रिय राजा रहे हैं और आज उनके अंतिम संस्कार यात्रा में हर कोई शामिल होना चाह रहा था और ऐसा लग रहा था मानो पुरा के जन समुह उमड़ पड़ा हो।

झाबुआ जिले के रियासत के ठिकानो में से सबसे बड़े ठिकाना सारंगी के रावले साहब वीरभद्र सिंह राठौर का आकस्मिक स्वर्गवास हो गया उनका स्वर्गवास होना सारंगी नगर के लिए बहुत बड़ी छती है नगर में धार्मिक आयोजन से लेकर सभी कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे पूरे सारंगी क्षेत्र में बीबी लाल के नाम से जाने जाते थे राठौर परिवार एवं नगर को उनकी कमी खलेगी नगर में सभी व्यापारी ने शोक व्यक्त करते हुए नगर के सभी प्रतिष्ठानों को स्व इच्छा से बंद रख कर श्री रावले साहब को अंतिम विदाई दी
उनकी अंतिम यात्रा ठिकाना सारंगी निज निवास से मुक्ति धाम पर पहुंची अंतिम यात्रा में नगर, सारंगी क्षेत्र के सभी ठिकानों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से सभी समाज वर्ग के लोगों ने उनको अंतिम विदाई देने पहुंचे मुक्तिधाम पर उनके बड़े पुत्र विश्वराज सिंह राठौर ने मुखारअग्नि दी अंतिम यात्रा में नगर के सभी समाज वर्ग के साथ ही नगर पत्रकार संघ सारंगी, ने श्रद्धांजलि देते हुए भगवान से प्रार्थना की भगवान उनको अपने श्री चरणों में जगह दे