वॉइस ऑफ झाबुआ
बृजेश खंडेलवाल की रिपोर्ट
आंबुआ:- इस व्रत को लेकर मान्यता है की हरतालिका तीज व्रत महिलाओं के लिए बहुत ही कठिन एवं महत्वपूर्ण होता है, यह व्रत दोस्ती भक्ति एवं वैवाहिक जीवन मैं सुख के महत्व का प्रतीक है, जो वैवाहिक महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और कल्याण के लिए शिव से आशीर्वाद मांगती है। उनके लिए यह बड़ा महत्वपूर्ण एवं कठिन व्रत माना जाता है! माना जाता है कि मां पार्वती ने शिव की प्राप्ति के लिए यह कठिन व्रत रखा था, उनके इस व्रत से 52वें जन्म में उन्हें भगवान शिव की प्राप्ति हुई थी।

यह व्रत कुंवारी लड़कियां भी रखती है जिससे उन्हें शिव स्वरूप वर की प्राप्ति हो। इस व्रत को लेकर आम्बूआ की समस्त महिलाएं जो एवं लड़कियों ने यह व्रत रखा । स्थानीय शंकरगढ़ राम मंदिर में शिव रूपी रेत का टीला बनाकर पूरी रात भक्ति भाव से पांच बार पूजा की पहले 7 बजे दूसरी 10:30 बजे, तीसरी 12:30 बजे, चौथी 3 बजे एवं अंतिम पूजा सुबह 5 बजे कर आरती कर उक्त सामग्री को सभी महिलाओं ने स्थानीय हथिनी नदी मैं विसर्जन किया, इस व्रत में महिला सुबह से लेकर दूसरे दिन सुबह तक निराहार बिना कुछ ग्रहण किये इस व्रत को पूरा करती है।
जो महिलाएं या लड़कियां इस व्रत को एक बार कर लेती है उसे पूरे जीवन तक हर स्थिति में इस व्रत को करना होता है इसे खंडित नहीं किया जा सकता ऐसी इसकी मान्यता है।