आदिवासी की जमीन को गैर- आदिवासी के नाम फोती नामान्तरण का आदेश जारी..
इस पूरे मामले में कलेक्टर को संज्ञान लेना चाहिए..
रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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झाबुआ। नियमों को ताक पर रखकर जिम्मेदार अधिकारी किस तरह से अपने पद और ओह्दे का दुरुपयोग कर रहे हैं इसकी बांनगी जिला मुख्यालय पर देखने को मिली जहां पर आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी के नाम पर फोती नामांतरण करने का मामला सामने आया है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) के तहत आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सकता परंतु झाबुआ तहसीलदार ने मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता की नियमावली को ही उलट फ़ेर कर दिया बनाए गए नियम कानून कायदों और गाइडलाइन के विपरीत तहसीलदार महोदय ने नियमो को ताक पर रखकर गांधी छाप की मोह माया में अपने कर्तव्य और पद का दुरुपयोग करते हुए ऐसा कारनामा किया है जिसे हर कोई अधिकारी करने का साहस नहीं करता परंतु यहां पर झाबुआ तहसीलदार ने कर दिखाया
मामला जिला मुख्यालय झाबुआ के ग्राम मिंडल का है जहां आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी के नाम फोती नामांतरण कर देने का मामला और उसके दस्तावेज वॉइस ऑफ़ झाबुआ को हाथ लगे हैं। जिस तरह से जमीन से जुड़ी जादूगरी कि कागजों में हेरा फेरी की कारीगरी की गई है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि लाखों करोड़ों रुपए की जमीन का मामला है और इस पूरे मामले में चिड़िया बिठाने वाले तहसीलदार महोदय को भी आर्थिक लाभ होता दिखाई पड़ रहा होगा तभी सरकार द्वारा बनाए गए नियम कानून कायदो को भी दरकिनार करके आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी के नाम फोती नामांतरण करने के आदेश जारी किए इससे जुडी तमाम दस्तावेजी ख़बर को अगले अंक में पढ़ियेगा उड़ता तीर कालम में.