आपका का भियां निकलेश डामोर
क्या भियां… दलाली की भी हद है… इन दिनों पत्रकारिता की आड़ में कुछ ऐसे आस्तिन के सांप पत्रकार के भेष में में कुकुरमुतो की तरह पनप गए हैं कि वे दो सौ 500 में पत्रकारिता के पवित्र धंधे को कलंकित करने से भी नहीं चुक रिये है.. ऐसा ही एक पेटलावद में दलाल किस्म का पत्रकार हैं जिसे हम कुटुंब चोर बकरे की औलाद कहने में भी परहेज नहीं करेंगे…. जो पूरा दिन सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते फिरता है और दो सौ , 500 के चक्कर में अधिकारियों को चमकाता फिरता है… नी चमके तो आरटीआई लगाता है… ऐसे खबरची से प्रशासन को भी सावधान रहना चाहिए… जो पत्रकार बिरादरी का नहीं हो सकता वह सिर्फ दलाली ही कर सकता है… आखिरकार चाटुकारिता की भी हद होती है.. जैसे ही पेटलावद बीएमओ सुरेश कटारा की खबर वॉइस ऑफ़ झाबुआ ने प्रकाशित की वैसे ही 200 500 में बिकने वाला यह कुटुंब चोर बकरे की औलाद दलाल एक दो पत्रकारों को और साथ में लेकर बीएमओ के पास पहुंचा और चिकनी चुपड़ी बातें कर हमारें खिलाफ ही षड्यंत्र रचने लगा ऐसे लोग समाज के लिए भी घातक है और पत्रकार बिरादरी के लिए भी… जिसे लुगाईयों ने दलाली के चक्कर में घसीट घसीट कर मारा.. खैर पर्दे के पीछे और भी पत्रकार बिरादरी के लोग अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। परंतु याद रहे मेरे पाले में आओगे तो पेले जाओगे और तुम्हारे काले चिट्टे और काले कारनामे उजागर करने के लिए मुझे मजबूर होना पडेगा…
लेकिन भियां जाते जाते एक बात और बिता दुं… बीएमओ के खिलाफ तो जंग जारी रेगी… और साहब को सारंगी तक सुकुन से छोडेंगे… पर भियां कुटुम चोर बकरे की औलाद तुमारा क्या होगा… जल्द ही तुमारा पीछवाडा गरम होने वाला है… दिख मत जईयों… अब जा रिया जय राम जी की।