संवाददाता @-सुनील खोड़े
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झाबुआ। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण पेटलावद विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक पार्टियों द्वारा अलग-अलग सर्वे के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन करने का काम किया जा रहा है…जिसमें भाजपा ने पहली सूची में ही पेटलावद विधानसभा के लिए भाजपा प्रत्याशी के रूप में निर्मला भुरिया को घोषित कर दिया है, लेकिन कांग्रेस अभी भी यह तय नहीं कर पाई है कि आखिर पेटलावद विधानसभा में कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा? और कांग्रेस किसके चेहरे पर पेटलावद विधानसभा में चुनाव लड़ेगी? कांग्रेस द्वारा फिलहाल नाम तय नहीं किया गया है। किंतु पेटलावद विधानसभा से कांग्रेस से वर्तमान विधायक वालसिंह मेड़ा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष अकमल सिंह मालू डामर अपनी दावेदारी दर्ज करवा चुके हैं…मालू डामर और वालसिंह मेड़ा दोनों ने ही कमलनाथ से मुलाकात कर टिकट की मांग की है…. माना जा रहा है की वालसिंह मेड़ा का कार्यकाल इतना ठीक नहीं रहा की एक बार फिर कांग्रेस से उन्हें मौका दिया जाए..!!!!
एक और मालू डामर भी पूरी ताकत के साथ कांग्रेस से दावेदारी करने से पीछे नहीं है, मालू डामर लगातार कांग्रेस से जुड़े रहे और वर्तमान में कांग्रेस से ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष है… मालू डामर 2010 से 2015 तक वार्ड क्रमांक 4 से जिला पंचायत सदस्य रहे, वहीं 2015 से 2021 तक वार्ड क्रमांक 12 में जिला पंचायत सदस्य रहे और मालू डामर द्वारा 2018 में झकनावदा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी रहकर कांग्रेस के लिए कार्य किया है। मालू डामर ने लगातार कांग्रेस को शिखर की ओर ले जाने का काम किया है। और दूसरी ओर वालसिंह मेड़ा जो की लगातार टिकट मिलने का और चुनाव में जीत दर्ज करवाने का दावा कर रहे हैं, उनके द्वारा क्षेत्र के लिए कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की गई। जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में वालसिंह मेड़ा को लेकर नाराज़गी दिखाई दे रही है, कांग्रेस के ही कई दिग्गज नेता वालसिंह के नाम को नकार चुके हैं उनके द्वारा मालू डामर को पूर्ण समर्थन दिया जा रहा है, और अगर मालू डामर को टिकट नहीं मिलती है तो उनके द्वारा अलग-अलग स्थान से चुनाव लड़ने का मन बना लिया गया है। ऐसे में कहीं ना कहीं कांग्रेस पेटलावद विधानसभा से चुनाव नहीं जीत पाएगी और यहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के आलाकमान द्वारा पेटलावद विधानसभा क्षेत्र में सर्वे करवाया गया है, उसमें भी वालसिंह मेडा की रिपोर्ट सही नही पाई गई। ग्रामीण क्षेत्रों में वालसिंह मेड़ा का विरोध देखने को मिला है, अगर कांग्रेस द्वारा आपसी सहमति बनाकर नए चेहरे पर टिकट की मोहर नहीं लगाई जाती है, तो कहीं ना कहीं इस आपसी फूट का नतीजा यह होगा कि पेटलावद से एक तरफ भाजपा की भारी बहुमतों के साथ जीत होगी। क्योंकि भाजपा में अब तक कोई गुडबाजी या फुट नजर नहीं आई है ऐसे में लगातार भाजपा के कार्यकर्ता चुनाव मैदान में काम कर रहे हैं। और एक और कांग्रेस आपस में ही सहमत नहीं हो पाई है, क्योंकि वालसिंह लगातार अपने आप को पेटलावद विधानसभा से उम्मीदवार मान रहे हैं लेकिन उनके साथ कुछ ही लोग शामिल है। लेकिन एक और मालू डामोर को कई कांग्रेस के दिग्गज नेता समर्थन दे चुके हैं, जिसको लेकर नेताओं ने कमलनाथ को भी सहमति पत्र सोपा है… वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी मालू डामर को युवाओं का खासकर समर्थन मिल रहा है, पेटलावद शहर की बात करें तो यहां भी मालू डामर को अच्छे वोट मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है..