दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा , आज से 21 साल पहले स्थानीय राम मंदिर के समीप पुराने थाने से सटा नगर का एक मात्र कांजी हाउस था जिसके लोग जो आवारा जानवर सड़को और गलियों में घूमने वाले जानवर आसपास के किसानों की खेती में रात को अचानक घुस जाते थे उनको किसान मिलकर पकड़कर कांजी हाउस में बंद कर जाते थे ।और नगर परिषद में और थाने में उस किसान के द्वारा शिकायत की जाती थी और किसी पालतू किसान के जानवर भी अगर खेती में जबरन घुस कर खेती की बरबादी करते थे उनको भी यहां बंद कर जाते थे लेकिन जिस दिन से नगर में भाजपा की नगर परिषद आई और फिर शुरू हुई नगर में दुकान बनाकर शासकीय जमीनों को बेचना। सबसे पहले राम मंदिर के पास स्थित कांजी हाउस को दुकानें बनाकर उसकी नीलामी कर बेचा और उसके बाद अयोध्या बस्ती में कांजी हाउस बना दिया गया कुछ समय बाद वहा भी दुकानें बनाकर उसकी भी नीलामी कर बेच दिया गया ।लेकिन बीते 10से 12 सालो से नगर में भाजपा की नगर परिषद है और वही घिसे पीते पार्षद जो सिर्फ शासकीय जमीनों की तलास कर उस पर दुकानें बनाकर परिषद अध्यक्ष के साथ उसकी नीलामी कर बेचने में ग्राहक ढूंढ ढूंढ कर लाकर अपना कमिसन लेकर उनकी हा में हा मिलाकर चुप हो गए लेकिन आज नगर में आवारा गाय और बैलों की संख्या आज एक दो से सेकडो हो गई नगर से लगी सभी खेती को वो अपना रोजाना भोजन बना रहे है जिस भी किसान के खेत में रात में घुसते है उसको एक ही रात में उजाड़ कर देते है ।नगर परिषद की लापरवाही और उनके द्वारा कांजी हाउस को दुकानें बनाकर बेच देने से आज आसपास के सभी किसान बेहद ही परेशान है ।लेकिन करे तो क्या करे जिन लोगो को उन्होंने वोट दिया उनकी लालच के कारण उनकी खेती रोजाना चौपट हो रही है ।लेकिन नगर परिषद की नींद नही उड़ रही है क्योंकि उनकी तिजोरिया तो अब सोने चांदी और रूपयो की गड्डियों से सजी जरूर होगी ।परंतु गरीब किसान के खेती के साथ साथ अपने घर में एक टाइम खाने का भी अनाज नहीं छोड़ रहे है यह आवारा जानवर क्योंकि आज इनको पकड़कर रखने की जगह नही होने से किसान इनको सिर्फ रातभर जागकर भागकर सिर्फ अपनी फसलों को बचाने को मजबूर है ।और नगर परिषद भी कई कांजी हाउस बना बना कर उसको दुकानों में बदलकर बेच बेच कर थक गई लगता है और अब नगर परिषद हिम्मत ही नहीं कर पा रही है की कांजी हाउस बनाए की नही क्योंकि उनको फिर से दुकानें बनानी पड़ेगी और दुकानें बनेगी तो फिर बेचनी पड़ेगी और अब तो नगर में इतने व्यापारी नही बचे की अब दुकानें भी खरीदेंगे।