Homeझाबुआकई जिलों में सूदखोरी के मकड़जाल में फंसा गरीब तबका

कई जिलों में सूदखोरी के मकड़जाल में फंसा गरीब तबका

 

 

@वॉइस   ऑफ   झाबुआ

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस प्रशासन पर हमें गर्व है,प्रदेश पर जब भी संकट आया पुलिस प्रशासन के साथियों ने दिन-रात एक कर काम किया और प्रदेशवासियों को राहत पहुँचाई, प्रदेश में कोविड का कठिन दौर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है,हमारे अधिकारी-कर्मचारियों ने अपनी जान दाँव पर लगा कर व्यवस्थाएँ संभाली और कुछ लोग इसमें शहीद भी हुए। कोविड काल में प्रदेश में सेवा का नया अध्याय रचा गया। पुलिस ने देशभक्ति और जन-सेवा के मूल मंत्र को साकार किया। प्रदेशवासियों को हमसे बहुत अपेक्षाएँ हैं, टीम मध्यप्रदेश बेहतर कार्य कर रही है, पर सुधार की गुजाइंश सदैव बनी रहती है।

जुआ, सट्टा और ड्रग्स समाज के दुश्मन


मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जुआ, सट्टा और ड्रग्स समाज के दुश्मन हैं। इनमें लिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। माँ-बहन-बेटी के सम्मान की सुरक्षा और उन्हें सशक्त करने के प्रयासों के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों को आजीवन कारावास और फाँसी तक की सजा दी गई ऐसे व्यक्तियों की आर्थिक रूप से कमर भी तोड़ी गई है। यह कार्यवाही असामाजिक तत्वों में भय व्याप्त करने में सहायक रही हैं।

प्रदेश का सुरक्षित वातावरण प्रदेश को निवेश के लिए बनाता है आदर्श स्थान


मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में व्यवस्था एवं सुरक्षा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। आगामी दिनों में प्रदेश में जी-20 देशों की बैठक होना है। यह देश वैश्विक स्तर पर ओपिनियन क्रिएटर है। हमारा प्रयास यह हो कि मध्यप्रदेश की विश्व में सकारात्मक छवि बनाने के इस अवसर का हम भरपूर उपयोग करें। प्रदेश का सुरक्षित वातावरण निवेश के लिए आदर्श स्थान बनाता है।

नशे के विरूद्ध अभियान चलाना आवश्यक

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में व्यापक स्तर पर नशामुक्ति अभियान चलाया जाए। जन-सामान्य को नशे के नुकसान की जानकारियाँ देने के साथ नशे के कारोबार में लिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए।

सायबर अपराध उभरती चुनौती


मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सायबर अपराध उभरती चुनौती है। सोशल मीडिया पर निरंतर नजर रखना आवश्यक है, क्योंकि थोड़ी से लापरवाही से इससे तनाव फैलना संभव है। पीएफआई सहित देश को कमजोर करने की गतिविधियों में संलग्न संगठनों के संबंध में सही समय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटेलीजेंस एजेंसियाँ सक्रिय रहें। इस कार्य में स्थानीय पुलिस भी अपना दायित्व निभाएँ। विदेशों से वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे एनजीओ किन गतिविधियों में लगे हैं, इस पर भी नजर रखी जाए। सामाजिक सोहार्द्र और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्कता और सावधानी आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश की पैदल गश्त की पहल को सराहा

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश पुलिस द्वारा मूलभूत पुलिसिंग में शुरू की गई पैदल गश्त की प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रशंसा की है। बीट व्यवस्था, माइक्रो बीट सिस्टम, औचक निरीक्षण, कोबिंग ऑपरेशन और राशि गश्त व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पुलिस के सड़क पर मौजूद होने से असामाजिक तत्वों और सामान्य व्यवस्था बनाए रखने में प्रभावी असर होता है। आरक्षक से लेकर अधिकारियों तक पुलिस तकनीकी रूप से सक्षम हों, यह समय की माँग है। इससे जन-सामान्य के साथ बेहतर संवाद और बेहतर नियंत्रण अधिक सक्षमता से किया जा सकता है। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों में चल रही भ्रांतियों और गलत जानकारियों का तत्काल खंडन किया जाए और आवश्यकता होने पर उपयुक्त कार्यवाही भी तत्काल सुनिश्चित की जाए।

वही इसके उलटे झाबुआ और अलीराजपुर जिले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उलटे ही काम होता दिखाई दे रहा है,कांफ्रेंस के माध्यम से भले ही शिवराज सिंह ने पुलिस की तारीफ के पुल बांध दिए परंतु धरातल में आमजन का पुलिस से विश्वास उठता ही जा रहा है,क्योंकि झाबुआ और अलीराजपुर पुलिस टीम किसी भी स्तर पर पुलिस को कामयाबी नही मिली हे,क्योंकि मध्यप्रदेश के दो पिछड़े जिलों में अवैध व्यापार बिना पुलिश के नही चलता है,इन अवैध धंधे की लंबी खासी लिस्ट हे जिसमे ड्रग,रेत,सट्टा,अवैध दारू,सप्लायर अनेक रूप से होती हे रात तो ठीक दिन में भी खुलेआम अवैध धंधा जोरों से चलता है,परंतु अवैध धंधेबाज पर पुलिस ने आज तक कोई बड़ी कार्यवाही नही करते हुए छोटी कार्यवाही करते हुए पीठ थपाली परंतु ऊपरी स्तर के माफिया को आज तक नही पकड़ पाई है।

जिले में अवैध धंधा बना सूदखोरी

झाबुआ और अलीराजपुर दोनो ही पिछड़े जिले होने के साथ आदिवासी बाहुल्य जिला है,ऐसे में कम शिक्षा के चलते आदिवासी समाज जिले के गांव गांव में बैठे सूदखोरी करने वाले व्यापारियों के चपेट में हे जिसके कारण आज तक व्यापारियों की चपेट से बाहर नही आ सके है,पूर्व में झाबुआ जिले के तत्कालीन कलेक्टर सी एस बोरकर ने सूदखोरी पर नियंत्रण करने के लिए कड़े प्रावधान करे थे परंतु जिले के नेताओं द्वारा बोरकर को हटाने के लिए प्रयास किया गया,बोरकर के जाने के बाद से ही जिले में सूदखोरी का माहोल बड़े स्तर पर चलने लगा वही इसका व्यापक असर दोनो जिले में देखने को मिला,वही सूदखोरी के चलते कई परिवार के युवकों ने आत्महत्या करके परिवार को मुसीबत में डाल दिया,सूदखोरी का मकड़ जाल जिले में भयावक स्तर पर देखने को मिल रहा है,जिससे शिवराज की धूमिल को खराब करने में पुलिस अधिकारी भी लगे हुए है,वही शिवराज की कथनी करनी को पलीता लगाने से कलेक्टर और एसपी बाज नही आ रहे है, समय रहते हुए अगर सूदखोरों पर नियंत्रण नही किया गया तो जिले का आमजन सूदखोरों के भंवर में फसता ही चला जायेगा। दोनों जिलों में सटटा जुआ और अवैध शराब पर नकेल कसना नितांत आवश्यक है तभी जिले में अपराधों पर लगाम कसी जा सकती है।

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