पार्टी अपनी रीति नीति को भूलकर सेठ के नजदीकियों या यूं कहे उनके इशारों पर कार्य करने वाली परिषद मे बिठाना चाहते हैं कुल मिलाकर अध्यक्ष भी उनके इशारों याने रबर स्टाम्प बनकर रहेगा क्योंकि सारी गोटी टिकिट वितरण में ही खेला किया जा रहा है और नापसंद वालो को फाटक बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है चार वार्ड एस टी वर्ग है वहाँ पर भी लगभग तीन सीटो पर उनकी पसंद के प्रत्याशी को टिकिट मिलेगी और एकाध जगह किसी अन्य के दबाव प्रभाव मे किसी अन्य को मिल भी गई तो राजनीति के बड़े शातिर खिलाडी सेठ कच्चे खिलाडी को चुनावी मैदान ए जंग में सियासी दाव पेच खेल कर पहले ही चीं बोला देंगे, कहने को ना रहे बाँस और ना बाजे बाँसुरी, साथ ही बाकि वार्ड में अपने प्यादे बैठा कर खुद उपकप्तान बन पूरी सत्ता अपने इशारों पर चलाने के मूढ़ मे है, पर अब आम पब्लिक भी सेठ की भावना से वाक़िफ़ हो गई है और उसने भी मन में ठान लिया है की राजनीति की पूरी बिसात बिछाने वाले को वार्ड एक मे ही पटखनी देकर सेनापति को निपटाओ और खेल खत्म। बाकिअगलेअंक में…………..