रावत साहब अपना डंडा इधर भी घुमाओ…! पुरे नगर में सटटे का मकडजाल फैला रखा है इन सटोरियों ने…!
अंकों का खेल भी निराला है… इसके मकडजाल में जो एक बार फंसा तो फिर हो कभी बाहर नही निकल पाता है… जिसके बाद या तो व्यक्ति बर्बाद हो जाता है या फिर उसे आत्महत्या करने पर मजबुर होना पडता है… सटटे के माया जाल में फंसे कई लोगों की आत्महत्या और घर छोड देने के कई मामले हमारे सामने है… झाबुआ नगर में भी ये मकडजाल दिन ब दिन फैलते ही जा रहा है… और इसी जाल की वजह से ही नगर में अपराध का ग्राफ बढता ही जा रहा है… पुलिस कप्तान आशुतोष गुप्ता के मार्गदर्शन में कई अपराधों पर अंकुष भी लगे है… अब पुलिस कप्तान के मार्गदर्षन में झाबुआ थाना प्रभारी संजय रावत साहब को भी इन सटोरियों पर डंडा घुमाने की आवश्यकता है… और अभी इन पर लगाम न कसी तो इन्ही सटोरियों की वजह से ही अन्य अपराधों को बडावा मिल सकता है… ये बढावा भी इस लिए मिल जाता है क्योंकि चंद छोटे तबके के पुलिस कर्मी थाना प्रभारी की कार्रवाई से पहले ही इन सटोरियों को सुचना दे देते है… और ये सटोरिये ही गलियारों में ये चर्चा करते नजर आते है कि 500 से 1000 रूपयें ठोलियों को दो… और कार्रवाई के पहले ही सुचना ले लो… 500 रूपयें में तो पुलिस बिक जाती है… तो डरने की क्या बात… बिन्दास सटटा लो… ऐसे में थाना प्रभारी रावत साहब को ध्यान देना जरूरी है क्योकि चंद खाकी वालों की वजह से पुरी पुलिस कौम बदनाम हो जाती है…।
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