संवाददाता सुनील खोडे
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पेटलावद। ग्राम पंचायत सारंगी में कथित रूप से फर्जी पट्टे जारी करने और शासकीय भूमि के मामले में बड़ा घोटाला सामने आने के बाद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और प्रभावित पक्षों का आरोप है कि पंचायत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कई लोगों को पट्टे जारी किए तथा इसके बदले लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। मामले से जुड़े कुछ वीडियो क्लिप भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें कथित रूप से राशि के लेन-देन और पट्टों को लेकर बातचीत दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले में ग्राम पंचायत की तत्कालीन निर्णय प्रक्रिया में सरपंच फुंदी बाई, उपसरपंच रंजीत सिंह तथा पंचायत सचिव की भूमिका संदिग्ध रही है। आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने लोगों को भूमि संबंधी अधिकार दिलाने का भरोसा देकर उनसे राशि ली और बाद में ऐसे दस्तावेज जारी कर दिए जिनकी वैधता पर अब प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
अतिक्रमण हटते ही खुलने लगी परतें
हाल ही में प्रशासन द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई के बाद यह पूरा मामला चर्चा में आया। जिन लोगों ने पंचायत के माध्यम से भूमि प्राप्त करने का दावा किया था, उनके सामने अब बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने पंचायत पर विश्वास कर राशि जमा की थी और उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि भूमि संबंधी सभी प्रक्रियाएं वैधानिक हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन जिम्मेदार लोगों ने मौके पर खड़े होकर कब्जे दिलवाए और लोगों को भूमि का भरोसा दिया, वही अब कार्रवाई शुरू होने के बाद सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
वीडियो क्लिप बन सकती हैं जांच का आधार –
सूत्रों के अनुसार मामले से जुड़े कुछ वीडियो और अन्य दस्तावेज प्रशासन तक पहुंच चुके हैं। इन वीडियो में कथित रूप से भूमि आवंटन और राशि के लेन-देन से संबंधित चर्चाएं दर्ज हैं। यदि जांच में इन वीडियो की पुष्टि होती है तो यह पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
सेवक भवन घोटाला भी होगा उजागर –
ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी पट्टा प्रकरण के अलावा पंचायत में हुए सेवक भवन घोटाला में भी जांच होना चाहिए। (विस्तृत खबर जल्द)
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पीड़ित पक्षों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभागों को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो कई और तथ्य सामने आने से पहले महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
एफआईआर की चर्चाएं तेज
सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ गई हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर सरपंच, उपसरपंच और सचिव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी किसी भी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।