सुनील तोमर आलीराजपुर
वन मंडल अलीराजपुर अंतर्गत इस वर्ष होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रम को एक महोत्सव की तरह मनाया जाएगा। वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण अभियान में जन सहभागिता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण से जुड़ सकें। साथ ही विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी वृक्ष प्रजातियों को भी वृक्षारोपण क्षेत्रों में लगाया जाएगा। अलीराजपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले रेंज अलीराजपुर, मथवाड़, कट्ठीवाड़ा, भाबरा एवं सोंडवा के जंगलों में सलई की प्रजाति अब बहुत कम दिखाई दे रही है।

वन क्षेत्रों में सलई के कुछ ही पुराने पेड़ शेष बचे होने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं पेड़ों से लगभग 4 से 5 हजार कलम निकाली जाएगी, जिनके माध्यम से नए पौधे तैयार किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि कलम से कोपल निकलने और पौधों के लगभग पांच फीट तक विकसित होने के बाद उन्हें सुरक्षित वृक्षारोपण क्षेत्रों में लगाया जाएगा। सलई के पौधों का संरक्षण कठिन माना जाता है, क्योंकि लगभग 100 पौधों में से केवल 20 पौधे ही सुरक्षित बच पाते हैं। सलई वृक्ष का उपयोग माचिस एवं गोंद निर्माण में किया जाता है। इस वर्ष मानसून के दौरान अलीराजपुर वन मंडल में करीब 5000 सलई के पौधे तैयार कर विभिन्न वन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। साथ ही 15 जून तक सभी रेंज क्षेत्रों में सलई के पौधे पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।