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क्या मोर सरक्षंण कक्ष के नाम पर हुआ आर्थिक लाभ का सरंक्षण ???  वन विभाग कार्यालय की छत पर बनाया गया मोर सरंक्षण कक्ष हो रहा अनुपयोगी साबित ?  मोर सरंक्षण कक्ष के नाम पर लगे फर्जी बिल, जमकर हुआ गोलमाल : सूत्र 

उड़ता तीर – सुनील खोडे 

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पेटलावद । राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण हेतु शासन प्रशासन विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहा है पेटलावद क्षेत्र मोरों के नाम से प्रसिद्ध है। यहां एक समय में बड़ी संख्या में मोर दिखाई देते थे, लेकिन वन विभाग की निष्क्रियता और लापरवाही के कारण मोरों की संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। कभी राष्ट्रीय पक्षी मोर जंगली जानवरों का शिकार हो रहे हैं तो कभी बिजली के तारों में उलझ कर अपनी जान गवा रहे हैं। लेकिन उनके संरक्षण के दावे करने वाला वन विभाग आंखें मूंद कर बैठा है या फिर सिर्फ अपना आर्थिक लाभ अर्जित करने तक ही सीमित है।

पेटलावद वन विभाग अंतर्गत 5 लाख रुपए से अधिक की राशि से मोर संरक्षण कक्ष का निर्माण किया जाना था, मोर संरक्षण हेतु बनाया गया कक्ष ऐसे स्थान पर होना था जहां मोरों का आसानी से आना जाना हो सके और मोरों के संरक्षण हेतु वंहा सारी व्यवस्थाएं की जा सके। लेकिन वन विभाग के जिम्मेदारों ने वन विभाग कार्यालय से लगी छत पर उक्त कक्ष का निर्माण करवा दिया। ऐसे में इस कक्ष का उपयोग न के बराबर हो रहा है। मोर संरक्षण कक्ष निर्माण के दौरान भी नियमों की अव्हेलना की गई है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि मोर संरक्षण हेतु बनाया गया भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है सूत्रों का कहना है कि जिस स्थान पर मोर संरक्षण कक्ष बनाया जाना था उन स्थानों का चयन नहीं किया गया और वन विभाग के कार्यालय पर कक्ष का निर्माण किया गया। कक्ष निर्माण के दौरान फर्जी बिलो का भुगतान भी किया गया है। नियमों के विरुद्ध हुए निर्माण कार्य के दौरान फर्जी बिलों का भुगतान हुआ है। सूत्रों ने बताया कि स्थानीय मोर समिति या मोर प्रेमियों की जानकारी के बगैर ही मोर संरक्षण कक्ष का निर्माण किया गया है। जिससे यही प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों को जो करना था उन्होंने वह कर लिया। अब क्या करना था वह भी बहुत जल्दी खुलासा करेंगे।

खबर से हटकर : विभाग को अपने इशारों पर चलाने वाले डिप्टी कि हर खेल में अहम भूमिका है। कहने को तो यह नाकेदार उर्फ डिप्टी नाम का ही डिप्टी है। जबकि विभाग के कुछ अधिकारियों की मेहरबानी से खुद को बड़ा अधिकारी समझता है। उक्त डिप्टी द्वारा निर्माण कार्यों के दौरान फर्जी मजदूरो की हाजरियां भरी जाती है। डिप्टी के कारनामे एक समय, एक तारीख, एक मजदूर और स्थान अलग-अलग होते हैं। जल्द ही मय-सबूतो के साथ डिप्टी साहब का भी चिट्ठा खोला जाएगा।

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