उड़ता तीर – सुनील खोडे
——————————-
पेटलावद ।वन विभाग द्वारा शहर के साईं मंदिर के समीप विभाग का एक भवन बनाया जा रहा है। लाखों रुपए की लागत से बनने वाले इस भवन की शुरुआत में ही भ्रष्टाचार की नींव रख दी गई है। लगभग सन 1982 में वन विभाग द्वारा यहां एक भवन का निर्माण किया गया था जो की जर्जर अवस्था में होने के कारण तोड़कर नया बनाया जा रहा है, उक्त भवन की देखरेख विभाग के जिम्मेदार डिप्टी रेंजर और रेंजर को करना थी। लेकिन मौके का फायदा उठाकर आर्थिक लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से रेंजर और डिप्टी रेंजर द्वारा पुराने भवन के मलबे से निकली पुरानी ईंटो को नए भवन की दीवारों में लगा दिया गया। जिस वजह से नया भवन नया होकर भी पुराना हो चुका है। विभाग के जिम्मेदारों की अंधेरगर्दी और मनमानी समझ से परे है। जबकि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी देखरेख में गुणवत्ता के साथ भवन का निर्माण करवाना चाहिए। लेकिन उसके उलट यहां कार्य किया जा रहा है।

पूरे मामले को लेकर जब पत्रकार द्वारा वन विभाग के रेंजर ओमप्रकाश बिरला से चर्चा करना चाही तो उन्होंने कहा कि ”कार्यालय आ जाओ… 26 जनवरी आ रही है… तुम्हारा देख लेंगे… तुम थोड़ा ध्यान रखना…” ऐसा कहकर रेंजर साहब पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हमने प्रमुखता से पूरे मामले को उजागर किया। मामला उजागर होने के बाद सुनने में आया है कि वन विभाग के एक व्हाट्सएप ग्रुप में खबरो को लेकर अनर्गल टिप्पणियों के साथ चर्चा की जा रही थी। वह स्क्रीनशॉट हम तक पहुंच चुका है। जिन-जिन व्यक्तियों के द्वारा टिप्पणियां की गई है उनके भी कालेचिट्ठे जल्द ही खोले जाएंगे….! ओर अंत मे हम पत्रकार है हमारा काम है खबरो को प्रमुखता से उठाना…. आप को अभी से बुरा नही लगाना चाहिए…..अभी तो शुरुआत है बड़े खुलासे बाकी है…. कहा-कहा रोड़ की हुई मरम्मत, कहा पक्की छत पर डाला गया मुरम… मोर सरंक्षण के नाम पर हुआ गोलमाल…डिप्टी साहब का ब्याज का धंधा… फर्जी मजदूरों की कहानी…. जल्द पढ़िए…..