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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत छात्र-छात्राओं का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बेटे-बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास में बाधा है बाल विवाह

रिपोर्टर सुनील खोडे

पेटलावद, शासकीय महावीर महाविद्यालय पेटलावद में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं महिला एवं बाल विकास विभाग झाबुआ के संयुक्त तत्वावधान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, साईबर क्राइम, हेल्पालाईन एवं वन स्टॉप सेंटर में दी जाने वाली सेवा विषय पर छात्र-छात्राओं एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राचार्य डां. कपिला बाफना के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

         कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्रीमती लीला परमार प्रशासिका व स्टाप सेन्टर झाबुआ, श्रीमती अनुरुक्ती साबनानी एस डी ओ पुलिस पेटलावद, श्रीमती वर्षा चौहान सहायक संचालक महिला बाल विकास विभाग झाबुआ तथा श्री जिमी निर्मल समन्वयक ममता युनिसेफ थे। स्वागत भाषण देते हुए प्राचार्य डा. कपिला बाफना ने कहा कि बेटी ईश्वर का वरदान है पुज्यनीय है अत: हम सब का दायित्व है कि बेटीयाँ सुरक्षीत रहे स्वस्थ रहे व शिक्षित हो। कार्यक्रम में सहायक संचालक श्रीमती वर्षा चौहान ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम पर चर्चा करते हुए बताया कि यदि कोई बालक बाल विवाह करता है या कोई व्यक्ति, अभिभावक, सरंक्षण, बाल विवाह को प्रोत्साहित करता है, आयोजित करता है या अनुमति देता है तो यह कानूनी अपराध हैं। विवाह आयोजक, पुजारी, बैंड-बाजा, टैंट, केटरींग, हलवाई, परिवहन प्रदाता या विवाह से जुडे अन्य प्रदाता भी बाल विवाह में सहयोग करते है तो उनके विरूद्ध भी कार्यवाही का प्रावधान है। कानून के अनुसार बाल विवाह में सहयोग करने पर अधिकतम 2 वर्ष का कारावास या 1 लाख रूपये तक जुर्माना अथवा दोनों दण्ड दिये जा सकते है। बाल विवाह समाज में फैला हुआ ऐसा अपराध है जो बालिकाओं और बालकों के शैक्षणिक, मानसिक व शारीरिक विकास में बाधा है साथ ही उनके अधिकारों का हनन करता है। इसलिए हम सबका कर्तव्य है कि बाल विवाह होने पर आवाज उठाए एवं हेल्पलाईन नम्बर 181 या 1098 पर सूचना करे।

         कार्यक्रम में एस.डी.ओ.पी श्रीमती अनुरती सबनानी ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा साईबर अपराध कम्प्यूटर, इंटरनेट या मोबाईल तकनीकों का प्रयोग करके की जाने वाली एक अवैध गतिविधि है, जिसमें व्यक्तियों, कम्पनियों को निशाना बनाया जाता है। इसमें फिशिंग, पहचान की चोरी, हैंकिग, वित्तीय धोखाधड़ी डिजिटल अरेस्ट रैसमवेयर जैसे कई प्रकार के अपराध शामिल है। साईबर अपराधी सोशल मीडिया, ई-मेल या नकली वेबसाईट के माध्यम से लोगों को लक्षित कर सकते है। उन्होंने कहा कि सोशल साईट नेटवर्किंग का प्रयोग सर्तकता के साथ करना चाहिए क्योंकि साईबर अपराधी इन्हीं के माध्यम से आपकी व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग कर आपके विरूद्ध या आपके नाम से अपराध कर सकता है। उन्होंने बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अपने अधिकारों, हितों को जाने एवं शासन द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ लेते हुए जीवन में आगे बढ़े।

         प्रशासक वन स्टॉप सेंटर श्रीमती लीला परमार द्वारा वन स्टॉप सेंटर के कार्यों महिला हिंसा एवं मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि बालिकाएं एवं महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को समझना और उसका उचित समाधान करना चुनौती पूर्ण कार्य होता है। हमारी वन स्टॉप की टीम द्वारा संवेदनशीलता के साथ परामर्श एवं अन्य सेवाएं दी जाती है। यूनीसेफ से डिस्ट्रीक कार्डिनेटर श्री जिम्मी निर्मल द्वारा बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य एवं एच.आई.वी. एड्स के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

         कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डा. लोकेन्द्र सिंह झाला ने किया व आभार विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रभारी डा. कान्हा डामोर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी के द्वारा बाल विवाह रोकथाम संबंधी शपथ ली गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी प्रो.घनश्याम बैरागी, डॉ. कैलाश मैड़ा, प्रो.मगन सिंह मसानियां ,प्रो. आयुष सिगांर, प्रो. सुरज सोलंकी, प्रो.प्रतिभा राठौर, डॉ. नेहा रघुवंशी, डॉ. नर्मदा भीण्डे ,श्रीमती गंगा डामोर, श्री चैन सिंह कोरट, श्री प्रेम भुरिया,श्री विजय वास्केल, श्री मुकेश कटारा, श्री साजन भाबोर, श्री सिद्धार्थ भुरिया सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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