दिलीपसिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
भारतीय दंड व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाली तीनों नवीन आपराधिक संहिताओं के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दिनांक 01 जुलाई 2025 को पुलिस नियंत्रण कक्ष अलीराजपुर में एक जन-जागरूकता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर श्री राजेश व्यास के निर्देशन में एवं उप पुलिस अधीक्षक अजाक श्री बी.एल. अटौदे की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य:
1. भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों की जानकारी देना।
2. आम नागरिकों को उनके अधिकारों एवं दायित्वों से अवगत कराना।
3. न्यायिक प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं पीड़ितोन्मुख बनाने की दिशा में किए गए सुधारों पर चर्चा।
4. जनभागीदारी के माध्यम से अपराध नियंत्रण में सहयोग सुनिश्चित करना।
प्रमुख वक्ताओं के विचार: श्री बी.एल. अटौदे (उप पुलिस अधीक्षक, अजाक) ने बताया कि नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों संगठित अपराध, मॉब लिचिंग, स्नेचिंग आतंकवादी क्रियाकलाप छोटे संगठित अपराधों के विषय में तथा पीड़ित केन्द्रीत प्रावधानों, fiR की निःशुल्क प्रति उपलब्ध कराने, अनुसंधान की प्रगति, जीरो FiR, E-FiR आदि के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया । नवीन अपराधिक कानून ने न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी, पीड़ित बनाया है । इन्हें देश की बदलती सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों, तकनीकी विकास, पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा एवं न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उप पुलिस अधीक्षक श्री सतीश द्विवेदी ने नए प्रावधानों की तुलना पूर्ववर्ती संहिताओं से करते हुए बताया कि अब कानून अधिक व्यवहारिक, सुलभ और समयबद्ध न्याय की दिशा में अग्रसर हैं। निरीक्षक श्रीमती मनोरमा सिसोदिया एवं उप निरीक्षक श्री योगेन्द्र मंडलोई ने नई धाराओं का व्यवहारिक दृष्टिकोण से अवलोकन प्रस्तुत किया और बताया कि अब आमजन को न केवल अधिक सुरक्षा मिली है बल्कि विधिक प्रक्रियाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।IPC की कमियाँ, जिन्हें BNS द्वारा दूर किया गया है

BNS 2023 के प्रमुख विशेषताएँ:
1. पीड़ित-केन्द्रित दृष्टिकोण:
• एफआईआर की निःशुल्क प्रति देना अनिवार्य।
• ई-एफआईआर और ज़ीरो एफआईआर की सुविधा।
• अनुसंधान की प्रगति की जानकारी पीड़ित को देना अनिवार्य।
2. आधुनिक अपराधों की स्पष्ट परिभाषा एवं कठोर दंड:
• साइबर क्राइम, मॉब लिंचिंग, स्नैचिंग, फर्जी विवाह, आतंकी गतिविधियाँ, बलात्कार की वीडियोग्राफी आदि को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
• संगठित अपराधों पर केंद्रित कठोर कार्यवाही के प्रावधान।
3. न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं तकनीकी समावेशन:
• घटनास्थल की वीडियोग्राफी को अनिवार्य किया गया।
• इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्यता।
• टाइमबाउंड चार्जशीट, जिससे न्याय में अनावश्यक विलंब ना हो।
4. प्रक्रिया का सरलीकरण एवं पारदर्शिता:
• विवेचना एवं परीक्षण की समय-सीमा तय की गई।
• लोक सेवकों के विरुद्ध अभियोजन की अनुमति की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया गया।
पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर श्री राजेश व्यास ने बताया कि नवीन आपराधिक संहिताओं (BNS, BNSS एवं BSA) के क्रियान्वयन की प्रथम वर्षगांठ पर अलीराजपुर पुलिस द्वारा जन-जागरूकतासंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त संहिताएँ न्याय प्रक्रिया को अधिक पीड़ितोन्मुख, पारदर्शी एवं तकनीकी समर्थ बनाकर त्वरित एवं प्रभावी न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।