झाबुआ अंकित चौहान
सुना है पेटलावद बीएमओ सुरेश कटारा सीना ठोककर कहते है यह पेटलावद है और यहाँ सिर्फ मेरी चलेगी क्योंकि स्वास्थ्य विभाग का मालिक मैं हूँ। नेता भी मेरे सामने कुछ नहीं…? पेटलावद अस्पताल के कायाकल्प हेतु रोगी कल्याण समिति की बैठक में लगभग 25 लाख रुपये के कार्यों को करवाने के प्रस्ताव मंजूर हुए थे । बैठक में पेटलावद विधायक निर्मला भूरिया भी मौजूद थी और निर्णय लिया गया सारे कार्य निविदा के माध्यम से किये जायेंगे। भंडार क्रय नियमों के अनुसार कोई भी निविदा अगर उसका मूल्य 5 लाख से ज्यादा है तो उसके लिए नियमानुसार ऑनलाइन निविदा आमंत्रित कर उसे 21 दिन का समय देना अनिवार्य होता है किंतु बीएमओ साहब को जल्दी इतनी है कि मात्र 4 दिन का समय देकर पूरी निविदा ऑफलाइन करने हेतु विज्ञप्ति प्रकाशित करवाई गई और अंतिम दिन 20 मार्च 2024 तक निविदा फार्म ही तैयार नही करवाया गया।

जब निविदाकर्ता टेंडर फॉर्म लेने गए तो पेटलावद बीएमओ ने खुद तो मोबाईल बन्द कर लिया और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ऑफिस बन्द करके भेज दिया मतलब अंतिम दिन तक ना तो टेंडर बेचे गए और ना ही टेंडर फॉर्म तैयार करवाया गया जब उक्त संबंध में एक निविदाकर्ता द्वारा फ़ोन पर बीएमओ सुरेश कटारा से चर्चा की तो उन्होंने बोला आप नाटक मत करो आपको एक दो काम दे देंगे।। उक्त सम्पूर्ण निविदा प्रक्रिया जब आमंत्रित की गई है जब जिले में आदर्श आचार संहिता लागू है और आचार संहिता में निविदा प्रकिया नहीं कि जा सकती किंतु बीएमओ साहब का बोलना है मै मंत्री जी का आदमी हूं यहाँ कोई नियम नहीं चलते सूत्र बताते है बीएमओ साहब सारंगी की कोई टिम्बर वाली फर्म से लाखों रुपये का भुगतान कर चुके है और वहाँ स्टोर कीपर के. सी. शुक्ला साहब के बराबर के पार्टनर है जो लोगो को बोल रहे निविदा प्रकिया निरस्त हो गई है बीएमओ साहब के अन्य कारनामों का खुलासा जल्द ही करेंगे