झाबुआ। प्रदेश सरकार को सरकारी मुलाजिमों पर लगाम कसना नितांत आवश्यक नजर आ रहा है। क्योंकि यहां शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं पर जिम्मेदार सरकारी मुलाजिंम पलीता फेरने में लगे हुए है… अब झाबुआ जिले की ही बात करें तो राष्ट्रिय आजिवीका मिशन परियोजना विभाग के तहत मिलने वाली स्कूल ड्रेस 2 वर्षो से नही मिली है… लगभग 17 करोड रूपये की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढती नजर आ रही है।
ऐसा लगता है कि बच्चों के तन ढकने वाली स्कूल ड्रेस भ्रष्टाचार की भेंट चढ गई है। तभी तो सत्र समाप्त होने और दुसरा सत्र प्रारंभ होने के बाद भी स्कूल
ड्रेस का वितरण नही किया गया। गत वर्ष जुलाई माह से स्कूल ड्रेस वितरण प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी थी… लेकिन एक वर्ष होने को है ऐसे में स्कूल ड्रेस
का नही मिलना जिम्मेदारों पर कई सवालिया निशान खडे कर रहा है।
अब तो जिले में आम चर्चा हो गई है कि हर बार की तरह इस बार भी जिम्मेदार अपना पेट भरना मुनासिब समझ रहे है। लगता है इस जिम्मेदारों के बच्चे भूखें मर रहे है और उनकी भूख तब मिटेगी जब बच्चों के तन ढकने वाली स्कूल ड्रेस पर ये डाका डालेंगे… तभी तो गत वर्ष की स्कूल ड्रेस जिम्मेदार अधिकारी अभी तक नही दे पाये…. बच्चों की स्कूल ड्रेस
से ज्यादा इनके बच्चों और परिवार वालों का पेट भरना जरूरी है…।
गत सत्र में कक्षा 1 से 4 तक व कक्षा 6 और 7 तक बच्चों को 4 जोड स्कूल
ड्रेस दिया जाना था… बीच में यह बात भी सामने आई कि 2 ड्रेस की राशि बच्चों के खातों में डाल दी जायेगी… या डाल दी गई है… लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ… बच्चों स्कूल ड्रेस का इंतजार करते ही रह गए। फिर दुसरी बात सामने आई कि बुरहानपुर से स्कूल ड्रेस आयेगी… जबकि जहां की बात कि जा रही है वहां तो सिर्फ कपडे की जांच होती है… और दिया भी जाता है तो कपडे की कटिंग करके दिया जाता है… न तो कपडा झाबुआ पहुंच और न ही स्कूल ड्रेस.. सुत्रों का कहना है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा बनी बनाई स्कूल ड्रेस अपने खास ठेकेदार से खरीद ली है…. बस लाना बाकि है अब लायें भी तो कैसे बात कुछ और कही गई थी हो कुछ और रहा है… सुत्रों का तो यह भी कहना है… इस रेडिमेंड स्कूल ड्रेस
के लिए समूहों पर भी बहुत दबाव बनाया गया था कि स्कूल ड्रेस
आयेगी और तुम्हे बस अपने समुहों के माध्यम से बटवाना है…. इस तरह कई प्रकार के दबाव बनाए गए। लेकिन जो राजनैतिक विरोध चल रहा है उसी वजह से ये स्कूल ड्रेस नही बट पा रही है। क्योंकि जो स्कूल ड्रेस वितरित होना थी वो नियम विरूद्ध क्रय की गई… जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ और सिर्फ अपना हित देख रहे है। उन्हे जिले के आदिवासी बच्चों की फिक्र ही नही है। वो तो सिर्फ राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर कार्य कर रहे है।
जयस संगठन ने दिया था मुख्यमंत्रीजी को आवेदन
विगत दिनों झाबुआ दौरे पर आये मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से जयस जिलाध्यक्ष विजय डामोर और उनकी टिम ने मुलाकात कर आवेदन सौंपा था…. कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन परियोजना विभाग द्वारा आदिवासी बच्चों को मिलने वाली स्कूल ड्रेस में भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। गत वर्ष मिलने वाली स्कूल ड्रेस
का नये सत्र के प्रारंभ होने के बाद भी नही मिलने की वजह से विभाग के आलाधिकारी द्वारा अपना हित देना.. उक्त स्कूल ड्रेस लगभग 17 करोड की लागत की है… न तो जिम्मेदार बोलने को तैयार है न ही जिला प्रशासन… हमें पता चला है कि विभाग के अधिकारी रेडिमेड घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस सप्लाय करने वाले है… ऐसे में ये तो गरीब आदिवासी बच्चों का ही नुकसान हुआ… उन्हे क्या है… सभी के कमीशन बधें हुए है… ऐसे में गरीब आदिवासियों को जो लाभ मिलना है वो मिल नही पा रहा है। सुना है भाजपा के पदाधिकारी भी इस ड्रेस
घोटाले में शामिल है।