वॉइस ऑफ झाबुआ।
सैया भये कोतवाल तो डर किस बात का यह कहावत स्वास्थ्य विभाग में चरितार्थ होती है इस बार मामला जिला चिकित्सालय का है।
सुनने में आया है कोई इमरान डंडी साहब की चापलूसी करते हुए वहाँ का मुख्य किरदार बन गया है। 200 बिस्तर जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन कुछ ना कुछ छूट पुट काम रोज निकलता है औऱ इमरान बस उसी की जुगत में लगा रहता है कि 1 का 4 कैसे किया जाये। अस्पताल में सभी वार्डो में वार्ड प्रमुख नियुक्त हुए है जिनका कार्य अपने वार्डों को दुरुस्त रखना है और उसकी रिपोर्ट सिविल सर्जन को देना है।
इन्ही छोटे कामों को इमरान बड़े दामों पर कर रहा है वह भी बिना किसी निविदा प्रक्रिया और बिना किसी भंडार क्रय के नियमों का पालन करते हुए।
जिला चिकित्सालय झाबुआ को कल्याकल्प एवं Nqas में लिया गया है हमारे सूत्र बताते है इमरान ने बिना किसी निविदा के जिला चिकित्सालय में पुताई का काम मोटे दामों पर किया है। अमानक स्तर के पुताई काम को पूर्ण हुए अभी 6 महीने भी नहीं हुए और पोपडे निकलना प्रारंभ हो गए।
सम्पूर्ण कायाकल्प की राशि 10 लाख रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी।
सूत्र बताते है की जिला चिकित्सालय को सम्पूर्ण कल्याकल्प अभियान के तहत 10 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई थी जिसे किसी बिना उचित प्रक्रिया के तहत 60-40 के अनुपात में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया।
बिना किसी आदेश के वार्ड इंचार्ज से काम की डिमांड बनवाता है इमरान।
हमारे सूत्र बताते है इमरान इतना शातिर है कि कोरे कागज़ पर इमरान कामों की डिमांड वार्ड इंचार्ज से बनवाता है और इन्ही से कार्य पूर्णता का प्रमाणपत्र ले लेता है और उसी का फायदा उठाकर ऊंचे दामों के बिल लगता है।
भुगतान किये गए देयकों का ना स्टॉक में पंजीयन ना उनका कोई प्रमाणीकरण।
सूत्र बताते है इमरान का साहब से ऐसा याराना है की उसके द्वारा प्रस्तुत देयक का ना तो कहीं भौतिक सत्यापन होता है ना स्टॉक पंजीयन होता है और ना ही कोई वेरिफिकेशन होता है सीधे बिल एकाउंट सेक्शन में जाता है और साहब की मौन स्वीकृति से भुगतान भी हो जाता है।
अगले अंक में इमरान ने कैसे किया बोरींग मोटर में खेल..