आपका भियां निकलेश डामोर
अरे वाह… सुना है फिर गरीबों पर अतिक्रमण मुहिम चालु होने वाली है… ये तो वो बात हो गई गरीब की जोरू सब की भाभी… हर बार अतिक्रमण मुहिम आती है और गरीबों पर चल कर चली जाती है… अरे दम हो तो बाजार के अंदर का अतिक्रमण हटा कर दिखाओं फिर जाने की सच में अतिक्रमण मुहिम चली… जिला प्रशासन एक बार छतरी चौक से राजवाडा तक एक बार अपने वातानुकुलित कमरों से बाहर निकल कर देखे तो सभी रसुखदारों के मकान तो ठिक दुकानें सडकों पर सजी है वो नजर नही आती और कुछ बचा हो वो नालियों पर ही ओटले बना कर सजा दिए गए है… किसी ने एक अंगुली बराबर जमीन नही छोडी है… अतिक्रमण आयेगा और छोटे जो दिन भर सामान बेच अपने परिवार का पेट पालते है उनके पेट पर लात मार कर उन्हे हटा दिया जायेगा… मानते है अगर थेलागाडी सडकों पर लगी है तो अतिक्रमण हटाना वाजिब है उन्हे पीछे कर व्यवस्थित किया जा सकता है। अब शंकर मंदिर की ही बात कर लो वहां रसुखदारों ने तीन चार दुकानें लगा कर किराये पर दे रखी है वहां से निकलना दुश्वार है ऐसीे अतिक्रमण हटायें तो वाजीब है… आपने वो जुदाई फिल्म तो देखी होगी जिसमें परेश रावल का एक किरदार है जिसमें उसका पेट कोई भी बात को लेकर फुल जाता है और चुगली किए बगैर उसे बात हजम ही नही होती है.. ऐसा ही कुछ नगर के कुछ दल्ले किस्म के संगठन और व्यापारी है… जो दिन भर फुल माला लेकर कुछ न कुछ कार्यक्रम के नाम पर अधिकारियों की दलाली करते रहते है…! कई बार इन दल्लों को कलेक्टर कार्यालय के आस पास भी देखा गया है जो जिला प्रशासन के आलाकमान को चुगली करते रहते है… उनका भी जुदाई फिल्म के परेश रावल की तरह फुला हुआ है उन्हे गरीबों की चुगली किए बगैर खाना हजम नही होता है… वो अपनी नही धोते है दुसरों की उन्हें ज्यादा पडी रहती है। ऐसे में अगर प्रशासन से निवेदन है कि पहले बाजार के अंदर का अतिक्रमण हटाया जाये फिर माने कि अतिक्रमण मुहिम चली है… वैसे भी नगर पालिका नही चाहती है कि नगर में गरीबों पर अतिक्रमण चले… लेकिन प्रशासन चाहता है अतिक्रम मुहिम चले तो बस एक बार बाजार के अंदर अतिक्रमण मुहिम चले।