@Voice ऑफ झाबुआ

राजनिती के गुर होना भी जरूरी है… वो सभी में नही होते है…कुछ एक लोग ही रणनीतिकार बनते है… जिनकी वजह से हर परीक्षा आसान सी होती है…जो अपने लिए नही जीते पुरे समाज के लिए लड मिटते है…ऐसे ही एक सख्श है कृष्णपालसिंह गंगाखेडी जो राजनीति के ऐसे रणनीतिकार है जिन्होने रानापुर में भाजपा का परचम लहराया।
सुना है रानापुर नगर परिषद चुनाव में भाजपा के कुछ लोग ही भाजपा की इज्जत उतारने में लगे हुए थे ताकि उनकी दुकानदारी कहीं बंद न हो जाये…ऐसे में इन विघ्नसंतोषी लोगों में मतदाताओं और कार्यकर्ताओ को भडकाया भी और विवाद होने की स्थिति भी उत्पन्न कर डाली,मगर कृष्णपाल की सुझ बुझ ने इन विघ्नसंतोषियों के मनसुबे पुरे नही होने दिए…ओर ऐसी रणनीति अपनाई की सारे खाने चित हो गए।
नगर परिषद चुनाव रानापुर में भाजपाईयों ने ही भाजपा का ढर्रा बिगाड दिया था…ऐसे में भाजपा के प्रत्याशियों की जीत संभव न थी…ऐसे में कृष्पाल सिंह ने एक अलग ही टीम का गठन किया और जनता के मतों को जाना….पुरा सर्वे होने के बाद नये चेहरों को टिकट देने का निर्णय लिया गया…इस निर्णय से भाजपा के नाम से दुकानदारी चलाने वालों को बडा ही दुख हुआ….इसलिए उन्होने भाजपा को नीचा दिखाने के लिए अथक प्रयास किए मगर कृष्णपाल सिंह की रण नीति के आगे सब फेल हुए…नए प्रत्याशी के चेहरों को जनता ने भी खुब सराहा… और अपार स्नेह देकर पार्षद पद पर काबिज किया…जिसकी वजह से जहां भाजपा के प्रत्याशियों की जीत होना निष्चित न था वहां 11 पार्षद भारी बहुमतों से विजय होकर जीत कर आये…ये जनता का प्यार और कृष्णपाल की रणनीति भी जोरों से काम आई…मात्र 15 दिनों में वहीं रह कर कृष्णपाल ने पुरा समीकरण ही बदल कर रख दिया…और अब रानापुर में भाजपा की परिषद बनना तय है… वो भी इसलिए हुआ क्योंकि कृष्णपाल का कुषल नेतृत्व और रणनीति…15 मेंसे 11 पार्षदों का जीतना सच में तारिफे काबिल हो…आने वाले चुनावों में भी ये रणनीति काफी काम आने वाली है….संगठन स्तर पर कृष्णपाल एक अच्छे राजनीतिज्ञ के रूप में सामने आये आये है।