जिले को मिले अच्छे अधिकारी…।
व्यवस्था में हुआ सुधार.. पिछला दरवाजा हुआ बंद…!
दलालों की नही हो रही दलाली तो चला रहे है आरोप प्रत्यारोप का दौर…!
पहले थाना प्रभारी… फिर एसडीएम अब कलेक्टर साहब..!
झाबुआ। जिले को अच्छे अधिकारी मिले है… जो व्यवस्था सुधारने के प्रयास में लगे हुए है….अब आम नागरिक तक पहुंच उनकी समस्या का हल किया जा रहा है… अपराधियों पर लगाम कसी जा रही है… जिले के नागरिक खुश है…अब जिलेवासियों को लग रहा है उनकी सुनने वाले हैं.
लेकिन दलाली या फिर यूं कहें चापलुसी प्रथा बंद होने लगी है…. दलाल खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे कहावत चरितार्थ कर रहे है… दलाली बंद हुई तो पहले थाना प्रभारी… की छवि धुमिल करने की कोशिश की… फिर एसपी साहब के पास गए… साहब ने ध्यान नही दिया तो… करने लगे प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार… दलाल का एडीएम कार्यालय में एक बाबु के साथ बैठना उठना था… सुना है वहां एसडीएम साहब ने दाल नही गलने दी… तो कहने लग गए ये झाबुआ है एसडीएम साहब… अब दल्ले को क्या पता इस आदिवासी बाहुल्य जिले से एसडीएम साहब अछुते नही है… प्रोटोकॉल होता है… पढ़ लेते तो बचपन से दलाली नही करनी पड़ती … अब कलेक्टर साहब को कह रहे है… डॉक्टर है तो क्या हुआ कई भी अस्पताल में पहुंच कर ईलाज करने लग जायेगा… अब इन्हें कौन समझाये… कलेक्टर बनने से पहले योगेश तुकाराम भरसट… डॉक्टर थे… जो सेवा की शिक्षा उन्होने ली वो अपने कर्तव्य का पालन तो करेंगे ही… अब सीएमएचओ साहब की पीछे दलाल पडा वो भी इसलिए की एक निजी अस्पताल में इसकी सेटिंग नही हुई…। अब ये दबाव बना रहा है कि हॉस्पिटल बंद करो… विभाग में हिस्सा चाहिए.. अरे… तु कोई… बड़ा नेता है… या कोई अधिकारी.एम तो हर अधिकारी को परेशान करेगा… अपने मन मुताबिक … काम करवायेगा… अरे तु तो दल्ला है… बचपन से…! सीएमएचओ साहब को अपने ही अधीनस्थों का ध्यान रखना होगा..!
जिले के अधिकारियों को देना होगा ध्यान
जिले में सारी व्यवस्था व्यवस्थित चल रही है… अब जनता को विश्वास होने लगा है… उनकी सुनी जा रही है… कलेक्टर साहब के अधिनस्थ अधिकारी हो या फिर पुलिस अधीक्षक महोदय के सभी को ऐसे दलालों को मुंह लगाने से पहले दस बार सोचना होगा… कहीं न कही… ऐसे दलाल अपनी दलाली पुरी नही होने की वजह से अधिकारियों की छवि धुमिल करने में लगे है… कब किस पर इस दलाल की नजर पड जाये… ऐसे में अपने कार्यालय में ऐसे दलालों का प्रवेश निषेध किया जाये। अधिकारी है अपना काम कर चले भी जाएँगे.. लेकिन जिले को ऐसे अधिकारी कभी नहीं मिलेंगे.!