
संवाददाता- सुनील खोडे |
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पेटलावद / झाबुआ । जो शहर को साफ-सुथरा रखता है, आज वही सफाई कर्मी खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। शहर को चमकाने वाला वर्ग ही जब अपेक्षाओं का शिकार हो जाए, तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है। न तो समय पर सैलरी मिलती है, न मूलभूत सुविधाएं। न उपकरण, न सम्मान। ऐसी स्थिति में आखिरकार सफाई कर्मी करे तो क्या करे?
लोकतंत्र में सभी को अपने हक-अधिकार के लिए आवाज उठाने का पूरा अधिकार है और इसी कड़ी में अब वाल्मीकि समाज का सफाई कर्मचारी वर्ग सड़कों पर आ गया है। विभिन्न मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण नगर अब कचरा-कचरा होते दिखाई पड़ रहा हैं और सफाई व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराने लगी हैं। इसी कड़ी में पेटलावद नगर परिषद के समस्त सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर विधिवत रूप से जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना देकर धरने पर बैठे हैं,
हम बात करें *इंदौर जैसे शहर* की, तो इन्हीं सफाई कर्मचारियों की बदौलत इंदौर लगातार कई बार स्वच्छता में नंबर वन पर रहा है। इंदौर को नंबर वन बनाने में इन सफाई कर्मियों के पसीने की बूंद-बूंद शामिल है।
सवाल यह है कि क्या इसी दृष्टिकोण को देखते हुए सरकार इन सफाई कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ समय पर सैलरी, उपकरण और उनकी विभिन्न जायज मांगें क्यों नहीं मान रही है?
इधर इस पूरे मामले में *राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ महाराज जी* ने भी हस्तक्षेप किया है और *मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी* का इस ओर ध्यान आकर्षित करवाया है। मुख्यमंत्री ने मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई निराकरण निकल कर आएगा और सरकार सफाई कर्मचारियों की बात को गंभीरता से सुनेगी, क्योंकि शहर की चमक इन्हीं के हाथों में है। और आज वही वाल्मीकि समाज का सफाई कर्मी सरकार की नीति ओर रीति की अपेक्षाओं का शिकार हो रहा है,