संवाददाता – सुनील खोडे
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पेटलावद ग्राम पंचायत अमरगढ़ के सरपंच पिंटू सिंह भूरिया की दो पैथोलॉजी रिपोर्टों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरपंच भूरिया ने पाटीदार लैब की जांच कराने, लैब को सील करने तथा उसका लाइसेंस निरस्त करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यदि एक शिक्षित जनप्रतिनिधि की रिपोर्ट में इतनी बड़ी विसंगति सामने आ सकती है, तो आम ग्रामीण और आदिवासी मरीजों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरपंच पिंटू सिंह भूरिया की 3 जून 2026 और 4 जून 2026 को पाटीदार लैब द्वारा दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट जारी की गईं। दोनों रिपोर्टों के बीच लगभग 24 घंटे का अंतर है, लेकिन कई महत्वपूर्ण रक्त संबंधी पैरामीटरों में अत्यधिक बदलाव दिखाई दे रहा है।

पहली रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 7.9 ग्राम प्रति डेसीलीटर, आरबीसी काउंट 2.62 मिलियन, कुल श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) 2400 तथा प्लेटलेट्स 1.35 लाख दर्ज किए गए थे। वहीं दूसरी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 11.2 ग्राम, आरबीसी 5.61 मिलियन, डब्ल्यूबीसी 4700 तथा प्लेटलेट्स 2.95 लाख दर्ज किए गए हैं।विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद हीमोग्लोबिन और कुछ रक्त मानकों में सुधार संभव है, लेकिन आरबीसी, एमसीवी और अन्य पैरामीटरों में इतने बड़े बदलाव तकनीकी रूप से जांच का विषय हो सकते हैं। खासतौर पर एमसीवी का 103.05 से घटकर 61.68 होना चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार विस्तृत परीक्षण और सत्यापन की मांग करता है।

सरपंच पिंटू सिंह भूरिया ने कहा कि यदि रिपोर्टों में त्रुटि हुई है तो यह केवल एक मरीज का मामला नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि लैब में प्रशिक्षु और गैर-विशेषज्ञ लोगों द्वारा सैंपल लेने तथा जांच प्रक्रिया संचालित किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू रिपोर्ट पर दर्ज पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर हैं। दोनों रिपोर्टों में एक एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम और अनुमोदन अंकित है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं, तो रिपोर्टों के सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जा रही है। क्या रिपोर्टों की वास्तविक समीक्षा विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा की जाती है या केवल औपचारिक रूप से नाम का उपयोग किया जा रहा है? यह जांच का विषय है।

सरपंच भूरिया ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही लैब के उपकरणों की कैलिब्रेशन, जांच प्रक्रिया, सैंपल प्रबंधन प्रणाली, रिपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया तथा विशेषज्ञ चिकित्सक की भूमिका की भी जांच की जाए।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि रिपोर्टों में वास्तविक त्रुटि पाई जाती है तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रहेगा, बल्कि हजारों मरीजों की जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होंगे। अब सभी की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इन रिपोर्टों में दिखाई दे रही विसंगतियों का वास्तविक कारण क्या है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।