रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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पेटलावद। पिछ्ले अंक में हमने बताया था कि मोहनकोट पंचायत भ्रष्टाचार के दलदल में पंचायत के जिम्मेदारों ने मरे हुए व्यक्ति के नाम पर निर्माण कार्य में मजदूरी करना दर्शाकर मरे हुए व्यक्ति के नाम की राशि निकाल ली गई। यहां पर अंधेरी नगरी चौपट राजा की तर्ज पर सारे काम काज संचालित होते हैं। जिसे रोकने टोकन वाला यहां कोई नहीं है। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि यदि जिम्मेदार अधिकारी निष्पक्ष पंचायत में निर्माण कार्यों की जांच और भौतिक सत्यापन करें तो निश्चित ही भ्रष्टाचार के साथ-साथ अनियमितताएं और लापरवाही भी सामने आएगी वैसे तो ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच तो की गई परंतु महज खाना पूर्ति. जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली जांच को आंच ना आवे की तर्ज पर जांच तो की गई परंतु जांच ऐसी की गई की ना सांप मरे ना लाठी टूटे मोहनकोट पंचायत का उपयंत्री पवन गुप्ता को भी जांच टीम में शामिल कर लिया वैसे तो पवन गुप्ता बड़ा ही शातिर उपन्यत्री है। जो अपने छोटे-छोटे कदमों से बड़े-बड़े पहाड़ नाप देता है। चाय की दुकान पर पवन गुप्ता सफाई देते फिर रहा है कि मोहनकोट पंचायत में किये गए निर्माण कार्यों का मूल्यांकन मेंने नहीं किया जो भी किया है सचिन ने किया है सचिन जाने यदि सचिव मूल्यांकन करने लग गए लग जाएंगे तो उपयत्रियों की क्या आवश्यकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार की राशि का दुरुपयोग करने में मोहनकोट पंचायत के जिम्मेदार नंबर वन पर हैं जो मरे हुए लोगों की राशि निकालकर बंदर बांट कर सकते हैं वह क्या नहीं कर सकते नवागत एसडीएम तनु श्री मीणा को इस पर गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही करना चाहिए जनपद सीईओ राजेश दीक्षित के पास शिकायत तो लाखों आती जाती है परंतु धीरे-धीरे शिकायतो का प्रारूप 3% ही रह जाता है।