रिपोर्टर-सुनील खोड़े
————————–
पेटलावद। वन विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही का खामियाजा इन दिनों राष्ट्रीय पक्षी मोरो को भुगतना पड़ रहा है। देख-रेख के अभाव में मोरो के लिए बनाया गया मयूर पार्क अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जबकि मोरो के संरक्षण और संवर्धन के लिए लाखों करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष सरकार द्वारा खर्च किए जाते हैं परंतु जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते और देख-रेख के अभाव में मोरो की संख्या में लगातार कमी देखने को मिल रही हैं, यदि वन विभाग चाहे तो मोरो का गढ़ कहे जाने वाले पेटलावद में एक बड़ा प्रोजेक्ट ला सकता हैं। जिससे मोर सुरक्षित भी रहेगे और मोरो की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती हैं। परंतु आज हालत यह हो चुके हैं कि राष्ट्रीय पक्षी मोर दर-दर भटकने को मजबूर है आखिरकार इसका जिम्मेदार कौन है क्यों वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
मोर के लिए बना मयूर पार्क का जंगला पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर टूट चुका है अब यहां पर मोर दूर-दूर तक नजर नहीं आते पेटलावद नगर के शासकीय भवन और लोगों के घरों की छतों पर घूम फिर कर अपनी जान बचा रहे हैं।
कभी बिजली के तारों की चपेट तो कभी कुत्तों का शिकार हुए मोर अपनी जान गवा चुके रक्षा और सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होना कहीं ना कहीं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है और जिम्मेदारों की मनमानी साफ तौर पर दिखाई पड़ती है।