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शिक्षा के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण भूमिका काले बोर्ड पर सफेद चाक चला कर कई विद्यार्थीयो की जिंदगी सवारने का काम किया!

Voice ऑफ झाबुआ

बृजेश खंडेलवाल कि रिपोर्ट

कहते हैं काला रंग बड़ा अशुभ होता है।पर स्कूल का ब्लैक बोर्ड जो काला जरूर होता है।परंतु वह सभी की जिंदगी बदल देता है आज हम बात कर रहे हे चंद्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में रहने वाले राकेश बिशन सिंह चंगोड़ की जिनका बचपन से केवल एक ही सपना था शिक्षक बनना और शिक्षक बनकर के बच्चों का सर्वांगीण विकास करना बचपन से ही राकेश कला के क्षेत्र में पारंगत रहे हैं। वैसे तो इनकी शुरुआत सर्वप्रथम भाबरा के सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुई है यहां पर इन्होंने 2001 से 2006 तक अपनी सेवाएं दी है। ज्ञात हो इस समय कक्षा 7 एवं 8 में अध्यनरत छात्र-छात्राओं में कई छात्र आज भी उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।इस विषय के इनके दोस्त श्री अभिषेक डावर भी गवाह है जो उस समय इनके साथ ही इस संस्था में कार्यरत रहे। ओर अपनी सेवाएं भी दी है।परंतु कहते ही की जो इस प्रकार ईश्वरीय कार्य में अपना तन मन धन लगा देते हे ईश्वर भी उनका साथ देता है जेसे की इनका दिया।राकेश और इनके दोस्त अभिषेक डावर दोनो की शासकीय सेवक के रूप में संविदा पद पर नियुक्ति हुई।2006 में नियुक्ति के पश्चात अपने पिता से मिली एक पुरानी सायकिल को लेकर चल पढ़े ठीक 8 किलोमीटर दूर अपनी संस्था प्राथमिक विद्यालय चौकीदार फलिया छोटा खुटाजा पहुंचे।

जेसे ही राकेश अपनी शाला में पहुंचे वहा केवल 1 ही कमरे में अपने सहयोगी शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाता था।

(नवाचार)

राकेश चंगोड़ के पास सबसे बड़ी कठिनाई आई तो वह थी बच्चो की उपस्थिति शाला में बहुत कम होना।ऐसे में क्या किया जाए के संख्या बच्चो की शाला में बढ़ जाए।

तब सर्वप्रथम पालक से संपर्क स्थापित करने हेतु घर घर संपर्क अभियान प्रारंभ किया।

बच्चो के लिए अपनी तरफ चॉकलेट लेकर आना साथ में पेम पट्टी(स्लाइट) छोटी छोटी कॉपी पेंसिल लाकर देना।

नवाचार अंतर्गत कक्षा कक्ष सज्जा एवम टीएलएम का निर्माण किया

प्रतिदिन बच्चो को सामूहिक रूप से खेल खेल में शिक्षा देने हेतु शिक्षा प्रद खेल खिलाना।

बच्चो के भय को दूर करने अर्थात शाला में भय मुक्त वातावरण निर्माण करने के लिए बच्चो के बीच शाला में प्रतिदिन संख्या पहचान गीत एवम वर्ण पहचान का कार्य करना।

प्रतिमाह पालकों की बैठक में बच्चो के इस प्रकार के सारे बिंदुओं पर चर्चा करना

बच्चो के साथ इस प्रकार नाचना गाना करते देख आस पास के सभी पालकगण इन्हे देखने के लिए पहुंच जाते थे।

ओर कहते थे

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माडसाहब तू तो नचाढ़ रियो इना पोरिया काजे इना मा भड़ावानो काम का करी रियो

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तब यह कहते थे- 

तमु घबराओ मती मारो भड़ावानों तरीके जरिक अलग से

इना मा तमारा पोरियां भड़ी भी रिया भी अने मस्ती भी करी रिया से

धीरे धीरे बच्चो को इस तरह से पढ़ाने पर पूरे गांव में बात फेल गई और अनुपस्थित रहने वाले बच्चे धीरे धीरे शाला में आने लगे और इनकी शिक्षक के रूप में एक अलग पहचान बन गई

उस समय कक्षा 4 एवम कक्षा 5 के बच्चो की जिम्मेदारी को भी सहयोग किया और बच्चो ने नए जोश और जुनून के साथ पढ़ना प्रारंभ किया।

कहते है की इस समय उसी गांव के एक शराबी व्यक्ति ने इनकी सायकिल को तोड़ दी थी। ओर खराब कर दी थी परंतु अपने मन में शिक्षा के इस कर्तव्य को लेकर बिना किसी को शिकायत किए अपना कार्य करते रहे। जब गांव के लोगो को इस बात का बच्चो द्वारा पता चला तब उन्होंने शिकायत करने हेतु इन्हे कहा परंतु इन्होंने मना कर दिया ऐसे में गांव के सरपंच ने उस शराबी के पास गांव के लोगो को लेजाने की सोची वह व्यक्ति गांव छोड़ वहा से भाग गया

कहते हे इनके द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थी आज शिक्षक बन गए हे तो कई विद्यार्थी अपने अपने व्यवसाय में भी लगे हुवे हे। जो आज भी इन्हे देखकर चरण स्पर्श करते हे। यह भाव अपने आप में अकल्पनीय हे क्योंकि शिक्षक जब गर्व से कहता है की मेने इस बच्चो को पढ़ाया है जो आज शिक्षक पद पर कार्यरत है डॉक्टर बन गया हे सी ए बन गये हे ओर सीईओ बनकर अपनी सेवाएं दे रहा हे।

उसी समय 2016 में एक दौर आया जिसमे इन्हे कक्षा 1 ओर 2 के शिक्षक प्रशिक्षण को प्रशिक्षित करने हेतु मास्टर ट्रेनर के रूप में भोपाल भेजा गया।इनके आने के पश्चात तकरीबन 1माह तक इन्होंने जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान अलीराजपुर में समस्त ब्लॉक के शिक्षको को प्रशिक्षण देने का मोका मिला।इसी समय खंड शिक्षा अधिकारी पद पर रहे श्री सतीश सिंह की नजर इन पर पढ़ी और उस समय बीआरसी पद पर रहे श्री शेखर कुलकर्णी द्वारा इन्हे बीएसी पद पर कार्य करने का मोका मिला। उस समय प्रशिक्षण प्रभारी के साथ साथ अकादमिक प्रभारी के रूप में इन्होंने कार्य करना प्रारंभ किया।

इन्होंने जब भी प्रशिक्षण ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित होता था तब ये शिक्षको से टीएलएम सामग्री का निर्माण जरूर करवाते नजर आते थे।ओर फिर शाला का सघन निरीक्षण कर अकादमिक स्तर पर उनकी मदद आज भी किया करते हे। ब्लॉक के सभी प्राथमिक स्तर के शिक्षक आज इनका बहुत सम्मान करते हे। ये आज भी जिन शालाओं में विजिट के लिए पहुंचते है सारे बच्चे इनसे गतिविधि करने हेतु जिद करने लग जाते है

इस तरह आज तक शिक्षा के क्षेत्र में अकल्पनीय कार्य करते रहते ।कहते हे की जिला स्तर पर जिलाधीश महोदय श्री राघवेन्द्र सिंह सर द्वारा इनके गतिविधि कराई जाने को लेकर भाबरा कार्यक्रम प्रमाण पत्र के माध्यम से सम्मानित किया गया था। ज्ञात हो की इन्हे जिला स्तर पर 5बार शिक्षण कार्य में अच्छे प्रदर्शन को लेकर सम्मानित किया जा चुका हे।

ये कहते हे की में बहुत ही भाग्यशाली हूं क्योंकि मेरे गुरु जिन्होंने मुझे पढ़ाया है आदरणीय बीईओ साहब श्री विनोद कुमार कोरी जिनके साथ में आज स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा हू।वर्तमान में भी मिशन अंकुर को लेकर नवाचार के क्षेत्र में इनके द्वारा शिक्षको को मार्गदर्शन दिया जाता हे।

ओर साथ ही इनके समस्त जनशिक्षक टोली एव बीआरसी श्री राजेंद्र बैरागी के साथ मिलकर शालाओं में शैक्षणिक गुणवत्ता में अकल्पनीय कार्य कर रहे हे।ओर ग्रुप के माध्यम से अपने पूरे भाबरा ब्लॉक को अकादमिक स्तर पर अग्रणी रखे हुवे हे। ओर अपने जिला अलीराजपुर को हमेशा अग्रणी बनाने का कार्य कर रहे हे।

इसीलिए आज इन्होंने अपने इस कार्य में सभी को सीखने सिखाने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसीलिए इनके द्वारा यूट्यूब चैनल

(RCBHBRA) अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जी के फोटो को अपना आदर्श मानकर केवल ओर केवल शिक्षा प्रद वीडियो बनाना और गतिविधि शेयर करना प्रारंभ कि हैं ।जिनका नया वीडियो बहुत जल्द शिक्षको की सहायतार्थ भेजा जायेगा

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