झाबुआ। कलेक्टर महोदया… शिक्षा के क्षेत्र में पूरा तंत्र खोकला नजर आ रहा है। यहां भ्रष्टाचार की ऐसी बानगी लिखी जा रही है… छात्र छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है और अपनी जेबे भरी जा रही है।
महोदया… मामला है कक्षा 9 से 12 तक खरीदी जाने वाली सांईस किट का… जिसकी आवश्यकता 11वीं व 12वी वाले छात्र-छात्राओं को नितांत आवश्यकता होती है… जिसके लिए एक बजट आवंटित होता है.. जिसमे लैब संबंधित सामग्री जो फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायो के छात्र-छात्राओं को उपयोग में आती है… इस सामग्री के क्रय के लिए स्टॉफ की एक समिति बनती है जिस सामग्री की ज्यादा आवश्यकता होती है उसे क्रय किया जाता है और विज्ञप्ति के माध्यम से कोटेशन भी मंगवाये जाते है… लेकिन झिरी, बालवासा, बोरडी, तलावली, गेहण्डी, बोडायता, कालीघाटी, घुघरी और गुणावद के प्राचार्यो के बाले बाले ऐसा खेल रखा बिल तो बन गए लेकिन सामग्री स्कूलों तक पहुंची नही।
कलेक्टर महोदया…. झिरी, बालवासा, बोरडी, तलावली, गेहण्डी, बोडायता, कालीघाटी, घुघरी और गुणावद की हाई स्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों को सांइस किट के लिए शासन की ओर से 1 लाख रूपए आवंटित किए गए थे। लेकिन यहां के प्राचार्यो ने बिना नियम कायदों को ध्यान में रख एक ही दुकान से सांइस किट खरीदने के सामग्री क्रय के कोटेषन भी ले लिए और सामग्री का आर्डर भी कर दिया… सामग्री तो पहुंची नही लेकिन बिल जरूर पहुंच गए और जहां कुछ एक सामग्री पहुंची वो भी घटिया किस्म की सामग्री पहुंची… जो एक दो बार में उपयोग होने पर ही अपनी योग्यता बता देगी… कलेक्टर महोदया इन 1 लाख रूपयों से छात्र-छात्राओं शिक्षा हेतु सामग्री क्रय की जाती तो उन्हें कितना फायदा होता… लेकिन भ्रष्टाचार के चलते प्राचार्यो ने जिन्हे शासन अच्छी खासी तनख्वाह देते है वो इस राशि को अपनी जेबों में भर छात्र छात्राओं के भविष्य से खिलवाड कर रहे है। इस सामग्री के क्रय के पश्यात जिला कार्यालय से इसका भौतिक सत्यापन होना चाहिए.. मगर क्या करें उपर से लेकर नीचे तक का बांस पोला है… सारे के सारे इस भ्रष्टाचार के खेल में संलिप्त है तो केसे जांच करेंगे। कलेक्टर महोदया अब आपकों ही इस ओर ध्यान देना होगा… ताकि छात्र छात्राओं के भविष्य से खिलवाड न हो सके। महोदया उस दुकानदार पर भी कार्यावाई होनी चाहिए तो घटिया और फर्जी बिल दे रहा है ताकि आगे कोई इस तरह से बच्चों के भविष्य से खिलवाड न हो सके।