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बिना अनुमती महाक्रांतीकारी शहीद छी किराड़ (मेहड़ा) मूर्ति स्थापित कर पूजा और गयाना करने वाले जयस पदाधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज । आदिवासी अपने ही समाज के क्रांतिकारी की पूजा नहीं कर सकते अंग्रेजी हुकूमत और आज की भाजपा सरकार के प्रशासन कोई फर्क नहीं । और तालिबानी शासकों की तरह काम किया जा रहा है जिले में ,,मुकेश रावत जयस

दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ 

अलीराजपुर ,, जिले के अलीराजपुर आम्बाबाबाड़ी में बिना अनुमति मूर्ति स्थापना और उसकी पूजा और गयाना कर बिना अनुमति धरना प्रदर्शन साथ ही शासन द्वारा बिना आलोट की हुई भूमि पर मूर्ति स्थापना कर शासकीय भूमि पर कब्जा करने के प्रयास जैसे आरोप लगाकर राजस्व विभाग के दीपक रावत भिलालापटवारी द्वारा जयस के अरविंद कनेश , मुकेश रावत , नितेश अलावा पटवारी , निरपाल बघेल , रतन सिंह शिक्षक रावत , शंकर सिंह तड़वाल, प्रदीप सरपंच पति , जगदीश , देवा कनेश , कैलाश किराड़, कमलसिंह तथा अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है ।

इनकी खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अलीराजपुर जिला भी तालिबानी शासकों की तरह साबित हो रहा है

आजकल आदिवासियों को आदिवासी की भूमि पर भी कोई हक नहीं सभी जमीन शासकीय होते हुवे भी मूल निवासियों की है और जब पूरे मध्यप्रदेश में पैसा कानून लागू है तो आदिवासी स्वयं ग्राम सभा के जरिए जहां चाहे वहां भूमि पर अपने समाज के क्रांतिकारी और वीर शहीदों की प्रतिमाएं पूजा गायन अपनी संस्कृति के हिसाब से पूजा भी नहीं कर सकते ।

अंग्रेजी हुकूमत में जैसे पूजा पाठ और आदिवादियों को अपनी ही जमीन से खदेड़ा गया मारा गया था साथ ही उनके खिलाफ मुकदमा चलकर उनको फांसी और काला पानी तक की सजा सुनाई जाती थी वैसे ही आज कल मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और उनका प्रशासन भी अंग्रेजों और तालिबानी शासकों की तरह जिले में काम कर रही है ।।

आगे अलीराजपुर जिले के आदिवासियों को अलीराजपुर जिला ही छोड़ कर विस्थापित होना नहीं पड़ जाए जो बड़े बड़े मंचों से भाजपा सरकार के मंत्री उनकी शहीद की प्रतिमा वोट और राजनीतिक कैरियर बनाने के लिए उनकी प्रतिमा और उनकी प्रतिमाओं को स्थापित करने के बहाने वोट और अपनी सरकार बनाने की बात करती है

साथ ही आदिवासियों की रीति रिवाज और परंपरा की पूजक और उसके विकास में सहयोग देने की बात करती है और जैसे ही उनका कसम और उनका स्वार्थ सिद्ध हो जाता है फिर कौन आदिवासी और कौन उनके क्रांतिकारी शहीद और समाज के लोगो को ही उनकी पूजा करने के लिए अनुमति नहीं देना और बिना अनुमति के कोई काम कर दो तो फिर पुरस्कार के रूप में रिपोर्ट दर्ज कर उनको हिड़मा बनाने और माओवादियों जैसा व्यवहार किया जाना कहा का नियम कानून है ।।

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