मध्यप्रदेश सरकार में आदिवासियों पर हो रही तानाशाही

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रितेश लोहार अलीराजपुर

मध्यप्रदेश में भाजपा के शासन में आदिवासियों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं, इसी को लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश है नेमावर, खरगोन, नीमच, रतलाम, मानपुर, खेरकुंडी, नालछा जैसे मध्यप्रदेश ही नही देश के कई क्षेत्र में बड़ी घटना भी हो चुकी है सरकार उन मुद्दों को लेकर सक्रिय नहीं है, लेकिन चुप रहना भी सरकार के ऊपर सवाल खड़ा कर रही है, क्या सरकार चुप रहकर आदिवासियों के ऊपर अत्याचार करवाना चाहती है? अत्याचारों को बढ़ावा देना चाहती है..? आदिवासियों को खत्म करना चाहती हैं? यह सवाल पूछना जायज है क्योंकि लगातार हो रहे अत्याचार के बावजूद सरकार तो किसी प्रकार का कठोर निर्णय नहीं ले रही है लेकिन समाज का युवा समाज के साथ हो रहे अत्याचार शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहा है, तो उनको परेशान करने के लिए निलंबन, जिलाबदर, लाठीचार्ज, ज्ञापन देने जाओ तो एफआईआर जैसी कार्यवाही कर रही है।

गुना में अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ रही महिला को जिंदा जलाया गया न्याय के लिए आवाज उठाई आंदोलन में पहुंचे तो नितेश अलावा को किया निलंबित किया गया, इससे पहले नेमावर जघन्य हत्याकांड के खिलाफ आवाज उठाने पर निलंबित किया गया था, समाज के लिए संघर्ष कर रहे, आवाज उठा रहे युवाओं पर इस तरह की कार्यवाही करके न्याय के लिए उठती आवाज को दबाया जा रहा है। सिर्फ कार्यकर्ताओं को ही परेशान नहीं किया जा रहा है बल्कि अत्याचार करने वालों को हौसला दिया जा रहा है, और इससे आदिवासियों पर अत्याचार और बडेंगे।

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