वाह मुफज्जल भाई यहां भी सरकारी भूमि पर किया अवैध अतिक्रमण….?

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@Voice ऑफ झाबुआ   

थांदला का प्रशासनिक तंत्र नीचे लेकर उपर तक भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ है… यहां के अधिकारी सरकारी नियम कायदों को अपनी जेब में रखते है और गांधीछापों के सामने नतमस्तक है तभी तो एक वर्ग विशेष के लोग जो न जाने कहां से मोटी रकम लाते है और सरकारी भूमि पर कब्जा चंद गांधीछाप टुकड़े सरकारी तंत्र को फेंकते है और जमीन उनकी हो जाती है। उसके बाद शिकायतकर्ता सरकारी तंत्र के समक्ष सर पटक पटक कर मर भी जाये तो कार्यवाई के नाम पर कुछ नही करते क्योंकि सरकारी मुलाजिमों को गांधी छापों की बडी सौगात मिल जाती है।
इसी का उदाहरण है मुफज्जल जिसने सरकारी भूमि पर कब्जा किया और जांच में दोषी भी पाया गया मगर तहसीलदार साहब मुफज्जल पर मेहरबना है? इस सरकारी जमीन पर सबसे पहले नजर मुर्तजा नूरूददीन की पडी जिसने इस काले खेल को खेला… उसके बाद इस बेस किमती जमीन को नुरूददीन ने दिनेश कलाल को बेची… दिनेश कलाल ने किसी राठौड को… और राठौड ने मुफज्जल को… ये क्रम चला… अब आप ही सोचियें किस तरह से सरकारी जमीन पर इनकी नजर रहती है और करोडों की बेस किमती जमीन को ये कोडियों के दाम पर खरीद मोटी रकम कमाते है। इस तरह से भू माफियाओं ने सरकारी तंत्र को अपनी जेब में रख सारा खेल किया।
अब मुफज्जल की नगर दुसरी सरकारी भूमि पर पडी उसका भी रिकार्ड पुराना है मगर पहले हम इसकी जानकारी आपको देते है की… सुतरेटी रोड पर कल्ला बाबजी मंदिर के सामने मुफज्जल ने एक बेस किमती सरकारी जमीन पर कब्जा किया जहां निर्माण के दौरान एक मजदुर की मृत्यु भी हो चुकी है। जिसके संबंध में नगर परिषद और राजस्व को नोटिस जारी कर उक्त निर्माण को तोडने के आदेस भी दिए गए थे लेकिन गांधी छापों का ऐसा खेल चला कि सारे आदेश हवा में उड गए और कागजों में हेराफेरी हो गई और निर्माण कार्य पर आज भी अवैध कब्जा है। अब आप ही बताईये थांदला के सरकारी तंत्र पर क्या भरोसा किया जाये।
अब कलेक्टर साहब को लेना होगा संज्ञान?
थांदला क्षेत्र में ऐसी कई सरकारी भूमि है जिस पर भू माफियाओं ने कब्जा कर रखा है और इन माफियाओं को सरकारी तंत्र ही संरक्षण दे रहा है। ऐसे में कलेक्टर साहब मुफज्जल जैसे भू माफियाओं की उक्त कब्जों की जांच करवाएं और इन अवैध अतिक्रमण को तुडवाते है तो शासन को करोडों भी सरकारी भूमि मिल सकती है और एक कारवाई हुई तो कई अवैध कब्जों के मामले सामने आ सकते है। थांदला के रहवासी इसलिए कुछ नही कहते है कि थांदला प्रशासनिक तंत्र को बिक जाता है। ऐसे में इन भू माफियाओं से कौन दुश्मनी लेगा?
सुतरेटी रोड पर कलाबाबजी मंदिर के सामने मुफद्दल घोड़े का सरकारी कब्जा जहां पर निर्माण के दौरान एक आदिवासी लेबर की भी मृत्यु हो चुकी है जिस के संबंध में नगर परिषद और राजस्व ने इस को नोटिस जारी कर उक्त निर्माण तोड़ने के आदेश दिए थे परंतु बाद में नोटों की सेटिंग के चलते उक्त निर्माण कार्य नहीं टूटा और ना ही कुछ हुआ और उससे ज्यादा निर्माण कार्य का आज कब्जा करा हुआ है। ऐसे में कलेक्टर साहब से थांदला की जनता आव्हान करती है कि ऐसे भू माफियाओं पर कार्रवाई करें और उनके निर्माण कार्य तोडे जाये। बाकी अगले अंक में पढ़िए…….

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