कैसे सुधरेगा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर?? खवासा,कुकडीपाडा संकूल की कई स्कूलें ऐसी जहां रोज हो जाता है हाफ डे।

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कैसे सुधरेगा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर??

खवासा,कुकडीपाडा संकूल की कई स्कूलें ऐसी जहां रोज हो जाता है हाफ डे।

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में शासन द्वारा शिक्षा का स्तर बढ़ाने व गुणवत्ता को सुधारने लिए तरह-तरह की नीतियां बनाई जाती है लेकिन स्कूलों में वास्तविक धरातलीय स्थिति क्या है यह देखने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी अपनी आफिस की कुर्सी छोड़कर कहीं धरातल पर निरीक्षण करते नही और जिम्मेदार शिक्षक जिन्हें वेतन से मतलब है। बच्चों की पढ़ाई हो या नहीं उससे कोई मतलब नहीं है।हालात यह है कि ग्रामीण में कई स्कूलों के ताले तक नही खुल रहे हैं। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,व बालक संकूल खवासा तथा कुकडीपाडा संकूल के अंतर्गत आने वाली कई स्कूलें ऐसी भी हैं जहां रोज 2 बजे बाद ताले लग जाते हैं।जिम्मेदार अपनी वाह वाही के लिए कागजों पर जानकारी बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं लेकिन शिक्षा व्यवस्था कितनी बदहाल है।ये आप खुद देख लीजिए।
मामला कुकडीपाडा संकूल के अंतर्गत आने वाली शासकीय माध्यमिक विद्यालय परवाडा का है।जहां पर आज स्कूल के ताले ही नहीं खुले।परवाडा के ही युवाओं द्वारा जब स्कूल जाकर देखा तो बच्चे खेलते हुए दिखाई दिए,लेकिन स्कूल बंद थी ना ही कोई शिक्षक आए थे।

इनका कहना है-
हम सभी युवा स्कूल पहुंचे तो 11 बजने के बाद भी स्कूल बंद थी।
आशिष भूरिया,हालू गामड, गोर्धन डामर,प्रेमचंद डामर, विशाल मैडा,संजय मैडा, मुकेश भुरिया,करणसिंह माल परवाडा।

मैं आज छुट्टी पर हूं,12:30 से 1:00बजे तक स्कूल खुली थी।धनराज डावर
संस्था प्रभारी शासकीय माध्यमिक विद्यालय परवाडा

अब सवाल यह है कि एक शिक्षक छुट्टी पर था या एक साथ में सभी स्थाई शिक्षक रामकन्या पाटीदार,कांतिलाल पाटीदार,रतनलाल कटारा,परमेश्वर डामर आदि सभी छुट्टी मना रहे थे??

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