तुगलकी फरमान की आदिवासी युवा सोशल मीडिया में उड़ा रहे है धज्जियां

860

@Voice ऑफ झाबुआ      @Voice ऑफ झाबुआ

दिलीपसिंह भूरिया आजाद नगर भाभरा

आलीराजपुर जिले की अनुविभागीय अधिकारी लक्ष्मी गामड़ का एक आदेश आजकल सोसल मीडिया में काफी ट्रेड कर रहा है जिन्होंने अलीराजपुर और कट्ठीवाड़ा उनके कार्यक्षेत्र के आदिवासी समुदाय और आदिवासी संगठनों को विश्व आदिवासी दिवस के दिन बिना किसी धारदार हथियार और बंदूक जेसे हथियार लेकर रेली या जुलुश में न आने का आदेश दिया है जिसको आदिवासी युवा और आदिवासी संगठन के युवा तुगलगी फरमान की संज्ञा दे रहे है और भारतीय संविधान को पढ़ने का बोल रहे है ।और अलीराजपुर के यह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र और इन क्षेत्रों में पांचवी अनुसूची के क्षेत्र में आते है जहा धारा 244के 1,2 में आदिवासियो का स्वशाशन का नियंत्रण हैं।धारा 13 में 3क रूढ़ी प्रथा ग्राम सभा का अधिकार है।धारा 19 के 5,6 कार्यक्रम व बोलने का अधिकार है, तो आप किसने यह अधिकार दिए है की आप आदिवासी समाज को उनके पारंपरिक और रूढ़िवादी प्रथा के अनुरूप अपने समाज के कार्यक्रम में इस प्रकार के आदेश देने की आदिवासी समाज के प्रति आपका यह गैर सामाजिक आदेश पूरे आदिवासी समाज को आक्रोशित कर रहा है आपका आदेश और कानून जब कहा हव्वा हो जाता है जब मुस्लिम समाज अपने जुलुश में तलवारों के साथ अखाड़ा निकते है और खेलते है और संघ की शाखाओं के लोग जब अपने हाथो में लाठिया लेकर और हथियारों के हाथ रेली का आयोजन करते है आपको सिर्फ आदिवासी समुदाय ही दिखाई देता है ।आप आदिवासी समुदाय का भ्रमित ना करे आदिवासी समुदाय का अपना पारंपरिक हथियार तीर कमान और फा लिया जिसको आदिवासी समाज के पूर्वज हमेशा अपने साथ रखते थे और उन्ही हथियारों के बल पर अंग्रेजो से आजादी की लड़ाई और विदेश आक्रमणकारी मुगल राजाओं से लोहा लिया था फिर आप ऐसा आदेश क्यों दे रहे है आपको कानून और संविधान फिर से पड़ने की जरूरत है और आदिवासियो के रितिरिवाज और पारंपरिक परंपराओं में किसी भी सरिया कानून और हिंदू ला के द्वारा किसी भी प्रकार का आदेश देने का अधिकार ही नहीं है ।आपको सिर्फ हमारे रीति रिवाज में सामिल होकर सिर्फ और सिर्फ व्यवस्थाओं को देखने की जवाबदारी है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here