जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह जी नींद से जागिए खाद व्यापारी खुल्ले आम लूट रहे है किसानों को?

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@Voice ऑफ झाबुआ     @Voice ऑफ झाबुआ

दिलीपसिंह भूरिया

आजाद नगर भाभरा ,,जिले की समस्त खाद दुकानों पर मिलने वाला यूरिया खाद जिसकी शासकीय कीमत मात्र 250 रुपए है ।तो जिले की प्रत्येक खाद की दुकानों पर खाद की बिक्री 450 रुपए क्यों है अगर है तो जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह जी आप क्या सो रहे हो जिले में आपके कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ अपनी कुर्सी तोड़ रहे है तो मोटी रकम लेकर प्रत्येक खाद की दुकान के व्यापारियों को खुल्ली लूट का लाइसेंस दे दिया है ।क्या आपका दायित्व नही है की गरीब किसान को भी उनका हक दिलाए या आपका भी इसके राजनेतिक लोगो और क्षेत्र के जनप्रिनिधि जिस प्रकार अपनी दलाली खाते है उसी प्रकार आपकी भी इसमें हिस्सेदारी है ।जिससे आप अभी तक आंखे मूंदे देख रहे है क्या आपका जिला प्रशासन सोसल मीडिया और समाचार पत्रों और पोर्टलों पर इस खुली लूट की सूचनाएं नही दे रहे है ।क्या आपने पूरा जिला ऐसे अधिकारियों को दे दिया है जो सिर्फ और सिर्फ वसूली ऐसे व्यापारी जो शासकीय नियमो को ताक में रखकर अपनी दुकानें सिर्फ मुनाफा खोरी के लिए चलाते है अब वो चौकीदार कहा गए जो सोसल मीडिया पर खुद को में भी चौकीदार हु लिखकर डालते थे आज उनका कुनबा गायब ही हो गया और तो और वो आदिवासी संगठन जो आदिवासी समाज के हितेषी और उनके समाज सुधारक बनकर किसी विशेष कार्यक्रमों में और इन आदिवासी संगठनों का उपयोग अपनी राजनेतिक रोटियां सेकने का काम कर रहे है उनकी अब विशेष जरूरत है ।आपको प्रदेश के अन्य जिलों की क्या समस्याएं है यह पता है तो अपने गृह जिले की क्यों नही क्यों आपकी आवाज चुप है क्यों आप सो रहे हो ।आलीराजपुर आदिवासी बाहुल्य जिला है जिसने आदिवासी क्षेत्र में संगठन में काम करने वाले लोगो की संख्या इतनी है जितनी खाद की बोरिया भी नही ।आपकी एक आंधी से बड़े बड़े राजनेता और राजनेतिक पार्टियां हिचकोले खाने लगी है ।और आप अपने ही घरों में और अपने ही जिला और गांव में मोन है इसकी वजह क्या है ।क्या आप भी चंदा खोरी कर विश्व आदिवासी दिवस इनकी मुफ्तखोरो से रुपया उगाही कर मानते आ रहे है या फिर आप कमजोर हो सिर्फ ताकतवर होने का ढोंग कर रहे हो ।या फिर आपकी 9 अगस्त की चिंता है की वो केसे होगा ।और उन नेताओ और जनप्रतिनिधियों से कहना चाहता हु की आपने बीते दो सप्ताह पूर्व ही आम किसानों और उनके परिवारों से उनके काम करने के लिए और उनको न्याय दिलाने के लिए वोट मांगे है ।और जब आपकी जरूरत किसानों को है और आपकी क्षेत्र की जनता को है तो आप धार्मिक स्थलों की यात्राओं पर माथा टेक रहे हो ।जनता आपके साथ इन व्यापारियों को अपनी खाद की बोरियों के दाम कम कराने के लिए इंतजार में है ।जिले में किसानों से खाद व्यापारी खुली लूट कर रहे है तब सत्ताधारी और विपक्ष सब मोन है क्योंकि उनका तो काम हो चुका है ।अब किसान का दुखड़ा कोन सुनेगा।
और जो सत्ता में वो भी तो किसी की भी सुन नही रहे है ।

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