कौन है ये इंदौरी विवेक जिसके दवाइयों के बिल पास होते है…!

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आपका भिया / निकलेश डामोर

सुना हैं सरकारी दवाइयों का खेल भी बड़ा रोचक है… ओर इन दवाइयों में के नाम पर भ्रष्टाचार में सिकने वाली रोटी अब जलने लगी है जिसकी खुशबू अब हवाओं में बहने लगी ओर ये खुशबू अब जनचर्चा का विषय बन गई है कि कौन है ये इंदौरी विवेक जिसके सीएमएचओ साहब से बड़े घनिष्ठ संबंध है.. सूत्रों की माने तो ये विवेक एक दवाई सप्लायर है… जिसका टेंडर पर्दे के पीछे से हुआ है… ओर अगर कागजों में कमी पेशी होती है तो सीएमएचओ साहब ओर मनीस उसकी पूर्ति करने में नही चूकते है… क्योंकि विवेक दूध देती गाय है… आप सोच रहे होंगे दूध देती गाय कैसे… तो सूत्र बताते सभी को मालूम है कि जिला चिकित्सालय में प्राथमिक ओर सामुदायिक केंद्रों पर दवाइयां नही है… जिसका कारण है कमीशन का खेल… दवाइयों का ऑर्डर होता है… बिल भी लगते है भुगतान भी हो जाता है मगर दवाइयां नही आती… ओर हो जाता है दवाइयों की राशि का बटवारा… सुना है पहले स्वास्थ्य अधिकारी का 70 परसेंट कमीशन था और विवेक का 30 परसेंट लेकिन अब मामला अलग है अब अधिकारी का 60 परसेंट ओर विवेक का 40 परसेंट है.. अब मरीज भाड़ में जाये.. राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर काम हो रहा है… गलियारों में दबी आवाज से यह भी सुनने मिला है दवाइयों के खेल में मेघनगर, राणापुर ओर थांदला बीएमओ की भूमिका भी है.. जो वरिष्ठ के साथ मिल अपने भूखे बच्चो की रोटी का इंतजाम गरीब आदिवासियों को मिलने वाली दवाइयों के रुपयों से कर रहे है…ओर वो ही दवाइयों के नही मिलने से कई गरीबो को बाजार से खरीदने के लिए कर्ज लेना पड़ा होगा.. ओर दवा की कमी से कई लोग ज्यादा बीमार पढ़ें होंगे… ओर कइयो की मौत हो गई होगी… मगर ये लाशो के ढेर ओर गरीबों का हक छीन अपने भूखे मरते बच्चो को रोटी दे रहे है उनके भोग विलास की आपूर्ति कर रहे है। या भी कब तक भ्रष्टाचार की पोल एक न एक दिन खुल ही जानी है. . लोग तो ये भी कहा रहे है ऐसे कारनामे बहुत है जो जनचर्चा का विषय जल्द भी बनते रहेंगे… मगर पहला ऐसा सीएमएचओ है जो जिले को लूटने आया है जैसे पुरानी जगह पद पर रहते किया था… अब करे भी तो क्या करे कागजो में हेराफेरी कहने वाले चटरगुल्ले जो है जो हेराफेरी करने में बड़े माहिर है… ।

जरा पता तो करो कोन हे ये…..बाकी अगले अंक में

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