कन्या छात्रावास में बाउंड्रीवाल टूट चुकी है,हो सकती हे कोई अप्रिय घटना?

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@Voice ऑफ झाबुआ     @Voice ऑफ झाबुआ

 

बड़ी खट्टाली कन्या छात्रावास बड़ी खट्टाली जहां पर छठी से आठवीं तक की 20 छात्राएं रहती है। उक्त छात्रावास का भवन जर्जर हो चुका है कन्या छात्रावास के आगे व पीछे दोनों कोने टूट चुके हैं। रात्रि में कभी भी बदमाश आसानी से घुस सकते हैं जहां कोई घटना घटित हो सकती है।इस संबंध में आदिम जाति कल्याण विभाग का कोई ध्यान नहीं है।गत दिनों जोबट विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती सुलोचना रावत ने भ्रमण के दौरान कन्या छात्रावास के भवन को देखा था एवं टूटी हुई बाउंड्रीवाल को भी देखा था एवं तत्काल सहायक आयुक्त जानकी यादव को दूरभाष पर तत्काल ध्यान देने की विशेष पहल की थी।

लेकिन आज तक उक्त कन्या छात्रावास की किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली जिस दिन दीवारे वह परकोटा टूटा था उसी दिन जोबट के एसडीएम देवकीनंदनसिंह एवं आदिम जाति कल्याण विभाग से अलीराजपुर के बीओ संजय परवाल ने आकर कन्या छात्रावास की स्थिति को देखा था। एवं आश्वासन दिया था कि शीघ्र ही उक्त बाउंड्रीवाल बन जावेगी लेकिन दोनों अधिकारी के अवलोकन के बाद आज तक बाउंड्रीवाल नहीं बनी दीवार गिरे लगभग 6 माह हो चुके हैं। आज रविवार को ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित सरपंच चैनसिंह डावर एवं पंचायत के जनप्रतिनिधि रमेश मेहता एवं विजय मालवी ने कन्या छात्रावास कर पहुंचकर भवन का एवं दीवारों का अवलोकन किया। भवन वास्तव में जर्जर होकर बाउंड्री वाल टूटी हुई है। जहां पर मेंटियां बंधी हुई है इस संबंध में सरपंच चैनसिंह डावर ने उपस्थित पत्रकारों को चर्चा करते हुए बताया कि शीघ्र ही इस संबंध में जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से पूरे घटना की जानकारी देंगे एवं बाउंड्री वाल हेतु पहल करेंगे।

इस संबंध में मेहता ने बताया कि उन्होंने पूर्व में जिला कलेक्टर राघवेंद्रसिंह एवं सहायक आयुक्त जानकी यादव को इस संबंध में अवगत कराया था।

कन्या छात्रावास परिसर में दो कक्ष की स्वीकृति प्राप्त हो गई है जिसकी लागत ₹8लाख है। उक्त कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा छात्रावास अधीक्षक का श्रीमती बनी डुडवे ने पत्रकारों को बताया कि उक्त वॉल बाउंड्री 6 माह पूर्व टूटी हुवी है संबंध में उन्होंने विभाग को पत्र प्रेषित किया है। साथ ही कन्या छात्रावास की छात्राओं ने गत दिनो विधायक श्रीमती सुलोचना रावत को पत्र प्रेषित कर कन्या छात्रावास की बाउंड्री वाल शिघ्र बनवाने की विशेष पहल की थी

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