कोठे की तवायफ और कुछ बिके हुए पत्रकार दलाल?सावधान थांदला

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Voice ऑफ झाबुआ

आज भारत में हर प्रकार का धंधा चल रहा हे जिसका उद्देश सिर्फ आजीविका चलाना होता है,भारत में समय समय पर बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का हवाला दिया जाता है पर आर्थिक शब्द कभी भी वेश्याओं के बाजार में इस शब्द को सुनना नही गया हे और ना ही तंगी देखी गई हे देखा गया तो सिर्फ और सिर्फ गर्म बाजार ही देखा गया हे,कुछ ऐसा ही मामला आज के समय में देखा जा रहा हे,अच्छे पत्रकार भूखे मरते हैं और संघर्ष करते रहते हे परंतु पत्रकारिता के दलाल कभी भूखे नहीं मरते,उनकी खूब चलती है,कुछ ऐसा ही नजारा आजकल थांदला के बाजारों में दिखाई दिया जा रहा हे, पेटलावद ही नही अपितु जिले में आंटी के नाम से महशूर हुई तवायफ का स्तर स्तर धीरे धीरे बढ़ता जा रहा हे,पेटलावद से अपने धंधे की शुरुवात करने वाली आंटी आज थांदला के बाजारों को गर्म कर रही हे आंटी तो ठीक कमसिन उम्र की लड़किया भी थांदला के बाजार को गर्म करने से थक नही रही हे?वही आज के डिजिटल युग में हर कोई अपनी अपनी ब्रांडिंग करवाने के लिए सोशल,मीडिया या पोर्टल में विज्ञापन देकर किया जाता है और जिसकी राशि भी अधिक होती हे पर आंटी और आंटी की कमसिन लड़कियों की ब्रांडिंग,विज्ञापन और प्रचार प्रसार खुद पत्रकार कर रहे हे?और यही नहीं आंटी और आंटी के लिए एक कमरा भी ले रखा है… किसी फ़ोटो ग्राफ़र के नाम से कमरा है। ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ उर्फ पत्रकार ने उनसे महीने का कमीशन अलग से लेते हे और और खुद गर्म भी होते है।आखिर कोन हे ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बदनाम करने वाले वैश्या के दलाल पत्रकार? आखिर कोन हे ये पत्रकार जो धर्म नगरी को बदनाम करने पर तुले है?आखिर कोन हे ये कोठे के दलाल जो तपस्या नगरी को बदनाम करने पर तुले हैं?आओ इसका पता लगाओ???

@अगले अंक में फिर मिलेंगे जानकारी के साथ

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