बरसाती मेंढक फिर बाहर आ गए है जिन्होने पिछला चुनाव हरवाया …वो अपने आपको बता रहे करीबी

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ये मेंढक सिर्फ श्रेय लेने आते है …ओर जमकर फ़ोटो खिंचवाते है

जसवंत को पहचानना होगा कोन अपना ….किसने दिया है साथ

तभी निष्ठावान नेता और कार्यकर्ताओं का मान बढ़ेगा

वॉईस ऑफ झाबुआ

सोनल जसवंत भाभर के अध्यक्ष बनते ही बरसाती मेंढक कुए बाहर आ गए कहते हैं ना कि आकांक्षाओं का कोई अंबार नहीं होता इसी तरह से कुछ नेता जो कि पिछले नगर परिषद चुनाव में जब जसवंतभाभर खड़े हुए थे और वह जब चुनाव हार गए थे जब उनके साथ रहने वाले लोगों ने भी उनसे दर किनारा कर लिया था यहां तक कि चुनाव में जसवंत ने जिन लोगों पर भरोसा जताया था वही लोग कहीं ना कहीं जसवंत को भेद कर हराने में कारगर साबित हुए और जैसे ही सोनल जसवंत भाभर के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की जीत की खबर उन्हें लगती है वह आओ देखते हैं ना ताऊ झाबुआ पहुंचकर जुलूस में लेकर नगर तक के जुलूस में इस तरह से नाचते गाते नजर आते हैं जैसे कि पूरा काम ही उन्होंने निपटाया हो और जसवंत को अध्यक्ष बनाया हो नाचे कूदे बांदरी और खीर खाए फकीर जैसा काम जसवंत के चुनाव में देखने को मिला है नगर के कुछ महत्वाकांक्षी नेता जोकि जिला पंचायत चुनाव के एक रात पहले तक कही ओटलों पर बैठकर मोबाइल चला रहे थे तो कोई अपने घरों पर बैठकर टीवी देख रहे थे किसी को यह पता नहीं था कि श्रीमती सोनल भाभर कल अध्यक्ष बन जाएंगे ना ही उन्हें ऐसा विश्वास था परंतु जसवंत बाबर के साथ कुछ ऐसे कद्दावर लोग जो कि स्वर्गीय श्री रतन सिंह जी भाभर को अपना गुरु मानते हैं उन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए सोनल जसवंत भाबर जब से जिला पंचायत का चुनाव जीते थे तब से जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव तक उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया और उन्हें जीत का सेहरा बंधवाया सोनलजसवंत बाबर के अध्यक्ष बनते ही फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपने आप को उनके करीबी बताने का जो दौर चालू हुआ वह नगर में काफी चर्चा का विषय रहा क्योंकि जिन लोगों ने सच्ची मेहनत की है उन्होंने तो कभी भी ना फेसबुक पर ना व्हाट्सएप पर इस तरीके का को दर्शाने की कोशिश की उन्होंने तो जमीनी नेता बनकर अपना फर्ज निभाया अब श्री भाभर को भी जरूरत है कि वह इन दोनों को पहचाने और सच्चे इंसान को पहचाने कि जिसने अपना साथ दिया है वह कौन है और जो मौकापरस्त लोगे वह कौन है जसवंत जी यह वही लोग हैं जो कि पिछले नगर परिषद में चुनाव में आपकेसाथ रहते हुए आपके पीठ में खंजर घोपा था जिसके कारण त्रिकोणी संघर्ष होते हुए भी आपको हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि निष्ठावान कार्यकर्ता मुंह पर नहीं बोलता है लेकिन ऐसे लोगों के करीब आने से कहीं ना कहीं उनकी और आप की दूरी बढ़ सकती है और आपका राजनीति भविष्य कोअगरआगे और उज्जवल है और इस आने वाले कल को सुधारने के लिए आपको जमीनी कार्यकर्ताओं की ही जरूरत पड़ेगी ना की इन मौकापरस्त कार्यकर्ताओं की सूत्रों की माने तो इस जीत के सही हीरो डॉ विक्रांत भूरिया के साथ में उनके पारिवारिक सदस्य नगर परिषद के उपाध्यक्ष मनीष बघेल उनकी मित्र मंडली को जाता है जिन्होंने दिन रात अपार मेहनत करके सभी कांग्रेसी सदस्यों को एकजुट करने का प्रयास किया और इस प्रयास में कहीं न कहीं सफल भी हुए

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