नही रोक पाया गोविंद भानु का रथ……

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VOICE ऑफ झाबुआ

राजनिती भी बडी टेडी खीर है… क्योंकि यहां पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के प्रत्याशी को निपटाने में लगे हुए थे… मगर जिसका जनाधार होगा उसका रथ आगे बढने से कोई नही रोक सकता है। ऐसा ही कुछ भानु भूरिया के साथ हुआ जिन्होने अपनी पत्नी को जनपद सदस्य के लिए खडा किया… उसे हराने के के लिए भाजपाईयों ने ही भानु के सरपट दौडते रथ को रोकने के लिए उनके ही वार्ड में उनके खिलाफ प्रचार किया मगर क्या था श्रीमती निर्मला भानु भूरिया अपने वार्ड से जीती भी और निर्विरोध अध्यक्ष भी बनी… और विरोधियों को मुंह की खानी पडी।सुत्रों बताते है कि महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष एवं रानापुर नगर परिषद अध्यक्ष सुनिता अजनार के पति अपने घमंड भरी बातों से हमेशा से ही सुर्खियों में रहते है,लेकिन इस जनपद चुनाव में इन्हें और इनके परिवार को मुंह की खानी पडी। विधायक पद के टिकट की लालसा रखने वाले गोविंद का परिवार जनपद जैसे छोटे चुनाव में अपने वार्ड में ही हार गए आपको बता दे सुनिता अजनार के पति गोविंद का परिवार रानापुर जनपद के 3 वार्डो से खडे हुए थे और तीनों वार्डो से इन्हे बुरी तरह से हार का सामना करना पडा। जिसे गोविंद अभी तक भूल नही पाए है। सुत्र तो ये भी बताते है भाजपा के राजनीति के 1 मुख्य कर्ता धर्ता है जिनके नेतृत्व में कभी तीनों विधायक जिले से विजय हुए थे उन्ही का आशीर्वाद गोविंद को है और उन्ही के दम पर ये उचकता है… इस जनपद चुनाव में गोविंद अजनार ने अपना मुख्य विरोधी कांग्रेस को ना मानते हुए भाजपा से ही उनके प्रतिद्वंद्वी भानू भूरिया को माना था और गोविंद अजनार जनपद के इस चुनाव में खुद के वार्ड को न देखते हुए भानू को किस प्रकार हराया जाए उसमे व्यस्त रहे। अब सवाल यह उठता है कि भानू को क्यों हराना तो उसका सीधा जवाब यह है कि भानू को जनपद ही हरा दो तो वार्ड में हारने के बाद विधायक की दावेदारी कैसे करेगा और इस पूरी पटकथा में राणापुर के उस बड़े नेता का पूरा साथ रहा जो पार्टी को अपनी माँ बोलने का ढोंग रचते है।हमारे सूत्र बताते है भानू भूरिया की पत्नि निर्मला भानू भूरिया के सामने कांग्रेस के दलबदलू नेता मथियास भूरिया चुनावी मैदान में थे और गोविंद अजनार खुद का वार्ड छोड़ मथियास के साथ भानू की पत्नि को चुनाव हरवाने के लिए रात दिन एक कर रहे थे भानू की पत्नि तो मथियास भूरिया के सामने रिकॉर्ड मतों से विजयी हो गयी पर विभीषण रूपी गोविंद अजनार का परिवार तीनों वार्डो से चुनाव हार गया।अब चुनाव हारने के बाद गोंविद अजनार और उसके आका को सहन नहीं हुआ और तय किया गया कि किसी भी स्थिति में भानू भूरिया की पत्नि जनपद अध्यक्ष नहीं बनाना चाहिए उसके बाद एक बार फिर पटकथा में कांग्रेसी मथियास भूरिया के साथ निर्वाचित जनपद सदस्यों को इस हेतू आगृह किया गया कि कोई भी सदस्य भानू को किसी भी कीमत में समर्थन ना दे किंतु आका ओर उनका चेला जब तक सदस्यों के पास पहुँचता उससे पहले ही भानू भूरिया 15 निर्वाचित सदस्यों में से लगभग 12 सदस्यों को लेकर गर्भ गृह में पहुँच जाते है और आका और गोविंद अजनार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।सूत्र बता रहे है भानू भूरिया जीते हुए 13 जनपद सदस्यों के साथ लगभग 18 दिन से गायब है और पर्दे के पीछे के कई बड़े नेता भानू को सहयोग कर रहे थे। इन 18 दिनों में से भानू लगभग 10 दिन इंदौर में कई दिग्गज इंदौरी नेताओं की शरण मे थे और वहाँ से पूरा खेल भानू और उनके मित्र खेल रहे थे। इस पूरे चुनाव में देखा गया भानू ने लोकल के नोताओं से दूरी रखी हुई थी और पूरी प्लानिंग इस बार भानू ने अपने मित्रों के साथ की थी। हमारे सूत्र बता रहे है भानू भूरिया अपनी पत्नि निर्मला भानू भूरिया राणापुर जनपद में निर्विरोध जनपद अध्यक्ष निर्वाचित करवाने हेतू एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है।भानू भूरिया को निपटाने के चक्कर मे गोविंद अजनार खुद का किला नहीं बचा सके। राणापुर नगर परिषद में कुछ ही महीनों बाद चुनाव होना है जहाँ सुनीता अजनार अध्यक्ष है अब देखना रोचक होगा क्या भानू की राह रोकने वाले गोविंद को इस चुनाव में भानू का साथ मिलेगा और नहीं तो कैलाश डामोर जो की राणापुर से कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष थे उनसे इस्तीफा दिलवाने के पीछे कहि भानू ने अभी से दाव तो नहीं खेल दिया।अब यह तो तय है राणापुर की राजनीति में आने वाला समय बहुत रोचक होगा।

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