जिला स्वास्थ्य अधिकरी के सामने सरकारी आदेश हवा में

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झाबुआ

  कहने को तो झाबुआ जिले को एक नई दिशा देने के लिए जिला कलेक्टर साहब रात दिन मेहनत कर रहे है और हर कार्य की समीक्षा भी खुद करते है पर न जाने क्यो जिला स्वास्थ्य अधिकारी कलेक्टर साहब के आदेशों को हवा में उड़ाने पर उतारू है इन्होंने जब से जिले का स्वास्थ्य महकमा सम्भाला है तबसे जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं लचर होती जा रही है स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज परेशान है जिनकी न कोई सुन रहा है न कोई सुनने वाला है कई बार लोग स्वाथ्य अधिकारी को भी शिकायत कर चुके है पर साहब है कि सुनते नही ….यही साहब आजकल अपने विभाग के अधिकारियो पर इतने मेहरबान है कि जिनके ट्रांसफर हो चुके है वह भी उनकी मूल पद स्थापना पर ड्यूटी देने की बजाए जहाँ पर थे वही डटे हुए है और सरकार को अंधेरे में रख रहे है क्या कलेक्टर साहब सरकार के आदेशों की कोई वेल्यू नही होती है ….? या जिला स्वास्थ्य अधिकारी सब पर भारी है ….?

स्वास्थ विभाग व्यवस्था बनाए रखने के लिए अटैचमेंट जैसा नियम बनाया होगा कि तत्काल कोई जनहित में सरकारी काम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारी से काम लिया जाए। अब यह व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए अधिक बलशाली हो गई जो काम ही नही करना चाहते है।
सबसे अधिक अटैचमेंट ग्रामीण इलाको में देखने को मिलते हैं कि पोस्टिंग किसी गांव में है और अटैचमेंट घर के पास बने सरकारी कार्यालय में है। इस पूरे प्रकरण को एक शब्द में लिखने की कोशिश करे तो यह लिख सकते है कि मूल काम को छोडकर आराम वाली कुर्सी को तोडना। मेघनगर स्वास्थ केंद्र पर अटैच कर्मचारी जिनकी मुलपदस्थापन उप स्वास्थ केन्द्र नवापाड़ा है जिसे मेघनगर स्वास्थ केंद्र पर अटैच कर रखा है यहां पर भी लक्ष्मीपुजा कर अटैच एमपीडब्ल्यू को लेखापाल का चार्ज दे दिया अब देखना है सीएचएमओ साहब इस एमपीडब्ल्यू को अपने मुल पदस्थापना पर भेजगेे या ऐसे ही लक्ष्मी पुजा से काम चलता रहेगा

क्या कहते है जिम्मेदार

मेरे पूर्व मै रहें मेडिकल ऑफिसर द्वारा अटैक एमपीडब्ल्यू दीपक परमार को लेखापाल का चार्ज दे रखा है

बीएमओ विनोद नायक

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