सलोनी शाहजी के 11 व मनोरमा लोढ़ा के अट्ठाई तप का श्रीसंघ ने किया बहुमान

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थांदला। स्थानीय पौषध भवन पर विराजित संत मण्डल पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी एवं पूज्य श्री सुयशमुनिजी तथा महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा – 4 के पावन सानिध्य में आराधक धार्मिक ज्ञान के साथ तपस्या कर रहे है। धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए स्वाध्याय प्रेमी पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी ने कहा कि जीव राग व द्वेष के वशीभूत अपना संसार बढ़ा रहा है। जिस व्यक्ति से उसका राग होता है उसके दोष भी गुण रूप लगते है जबकि द्वेष में जीव गुण को भी नजर अंदाज कर देता है। उन्होनें संसार से अरुचि निर्वेग भाव का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि जब जीव में निर्वेग भाव आते है तो वह धर्म के निकट आता है और अपना संसार घटा लेता है, लेकिन इसके लिए इन्द्रिय विषयों व कामभोग की आसक्ति छोड़ना आवश्यक है। धर्म सभा में पूज्य श्री सुयशमुनिजी ने मृगापुत्र चारित्र के माध्यम से तप के अभ्यन्तर भेद का वर्णन करते हुए स्वध्याय, ध्यान व कायोत्सर्ग तप की विशेषता बताई।

तपस्वियों का हुआ बहुमान – महासतियाजी ने गाया तप स्तवन

चातुर्मास काल के श्रावण भादौ मास में थांदला नगर में तपस्या का दौर चल रहा है। जिनमें बाल वृद्ध युवा सभी वय के आराधक तपस्या कर रहे है। इन्ही तपस्याओं में आज अणु बालिका मण्डल अध्यक्ष कु. सलोनी अनिल शाहजी ने 11 उपवास व धर्मलता महिला मंडल की सदस्य श्रीमती मधु बहन लोढ़ा ने 8 उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किये। दोनों ही तपस्वियों के लिए क्रमशः श्रीमती पिंकी रुनवाल ने 16 उपवास तथा सूरजमल श्रीमाल ने 11 उपवास की बोली लगाकर श्रीसंघ कि ओर से बहुमान किया। इसी क्रम में सभी तपस्वियों

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