लुट सको तो लुट लो…! कि तर्ज पर भ्रष्टाचार की इबादत लिख रहा है जिला स्वास्थ्य विभाग

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वाॅइस ऑफ झाबुआ निकलेश डामोर

आपने वो कहावत तो सुनी होगी… अपना काम बनता भाड में जाये जनता… मतलब साफ है सिर्फ अपने हितों को ही महत्व देना… ऐसा ही कुछ हमेशा से सुर्खियों में स्वास्थ्य विभाग में हो रहा है क्योंकि यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मुंह भ्रष्टाचार की चासनी ऐसी लगी है कि वो अपने हितों के लिए गाडी कमाई देने वाले कर्मचारियों को सारे नियम कायदे तांक में रख कुर्सी पर बनाये रखना चाहते है और स्वास्थ्य विभाग में अपनी ढपली अपना राग आलाप रहे है। जनचर्चा तो यह है कि अब तक के सबसे फिसडडी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के सुस्त रवैये की वजह से पूरा विभाग कठघरे में खडा नजर आ रहा है। स्वयं के विवेक की बात तो दुर नियम कायदों को भी धता बताने में पीछे नही रहते है।आपने वो भी कहावत सुनी होगी…की अंधा बांटे रेवडी,फिर अपने अपनो को देय… मतलब साथ है संर्पूण लाभ खुद और आपनों के लिए उठाना… और जो साहब की हां में हां नही मिलायेगा उसे सीएमएचओ साहब सहन नही कर पाएंगे…साहब को सिर्फ दुधारू गायें ही चाहिए… नियमों तथा ईमानदारी से काम करने वाले स्टाॅफ नही चाहिए…इस विभाग में उपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार की वैतरणी बह रही है… यहां कागजों में ऐसी हेराफेरी होती है कि कोई गलती भी निकाल नही सकता।सुना है सीएमएचओ साहब में निर्णय लेने की क्षमता नाम मात्र की भी नही है…तभी तो वर्तमान में जिला लेखा प्रबंधक मनीष सेन के मुताबित ही यहां सब कुछ हो रहा है। तभी तो साहब ने जिला लेखा प्रबंधक मनीष सेन को कुर्सी उपहार में दे रखी है…सुना है साहब ही अपने सारे खेल को खेलने के लिए लेखापाल महाशय को लेकर आये है…तभी तो इनका मोह मनीष साहब से हट ही नही रहा है?ज्ञातव्य है कि प्रदेश में हुई लेखा प्रबंधन की भर्ती निरस्त की जा चुकी है पर लक्ष्मी यंत्रों की चाह में मनीस स्टे ले आया। सीएमएचओ साहब को भी अपने इस सिपाही को जाॅइन कराने की इतनी जल्दी थी कि नियमों की धज्जियां उडातें हुए उसे एक तरफा जाॅइन करवा दिया। बडी बात तो यह है कि एक तरफ अपने चहेते मनीस को जाॅइनिंग के लिए साहब ने शासन से पत्र लिख कर मार्गदर्शन मांगा… वहीं दुसरी तरह बिना मार्गदर्शन प्राप्त किए ही मनीस को ज्वाॅइन भी करवा दिया और वित्तीय प्रभार भी सौंप दिए। प्रमाणों की बात करें तो मनीष सेन को हाई कोर्ट के आदेश अनुसार अगली दिनांक तक को स्टे मिला है मगर मनीष साहब उसे आजीवन का स्टे मान चुके है, सीएमएचओ साहब और मनीस सेन को तो सिर्फ कोर्ट का बहाना चाहिए था जो उनको एक स्टे के रूप में अल्प समय के लिए मिला, किन्तु उन्होने उसको आजीवन मान लिया।सुत्रों का कहना है कि सीएमएचओ साहब के कोई कटारिया सप्लायर भी खास हैं ये तीनों मिल जिला स्वास्थ्य विभाग को लुटने में लगे है और सारे कागजों में हेराफेरी मनीस ही करता है… ऐसे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ठाकुर साहब के भ्रष्ट कारनामों को ही उजागर किया जाये तो तय है इनके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी। झोलाछाप डाक्टरों से जांच के नाम पर महिना बंदी… सरकार बजट को कागजों में हेरोफेरी कर दुरूपयोग… सरकारी क्वाटर अलाॅट करने में कमीसन, नियमों को तांक में रख कर्मचारियों का अटेचमेंट… वाहनों में हेराफेरी… इन सब के नाम पर ये मोटी रकम वसुल कर अपनी जेबे भर रहे है है और बरसों से एक ही कुर्सी पर बरसों से अंगद के पेड की तरह जमे लोगों से इन्हे मोह क्यों है ये बडा प्रश्न है? ऐसे कई उदाहरण है जिसमें सरकार को ये किस तरह से चुना लगा रहे है ये जनता को बताना हितकर है ताकि प्रदेश के मुखिया तक इन भ्रष्टों का नाम पहुंचे और इनके काले कारनामें उजागर हो सके। हम आपसे फिर मिलेंगे नए मुददों के साथ… पहले तो आप ये पढिये किस तरह से मनीष को बचाने में लगे सीएमएचओ साहब… मय दस्तावेजों के साथ…!

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