लोकतंत्र की जय हो,देश मे लोकतंत्र जिंदा है साबित किया-सोलंकी

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आयुष डावर/बड़वानी

  आदिवासी समाज का बेटा महज कुछ ही समय पहले सामाजिक संघर्ष में कदम रखता है, बेरोज़गार,विद्यार्थियों की लड़ाई हमेशा सड़कों पर लड़ने वाले एक युवा ने राजनीति की परिभाषा ही बदल दी। अगर आप लोगों का दर्द महसूस कर सकते हो और आपको उनके लिए कुछ करना है तो रास्ते अपने आप बन जाते है। यही बात चरितार्थ कि बड़वानी जिले के छोटे से गाँव सोल्यापूरा (बालसमुंद) के निवासी सुनील पिता श्री जगदीश सोलंकी ने। जिस उम्र में युवा खुद के लिए कुछ करते है उसी उम्र में सुनील जनपद सदस्य का चुनाव जीतकर अपने गाँव और अपने क्षेत्र के लिए विकास के आयाम गड़ेगे। एक समय ऐसा माना जाता था कि राजनीति करना सिर्फ पैसों वालों का काम है लेकिन आज सुनील जैसे युवाओं ने राजनीति की परिभाषा बदल दी है। अब वक्त आ गया है राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा अब राजा वही बनेगा जो हकदार होगा भले ही वो झोपडी में रहने वाला गरीब घर का लड़का ही क्यों न हो, वो भी राजा बन सकता है। जब सुनील सोलंकी जैसे गरीब घर के लड़के पैसे वाले और वर्चस्ववादी लोगों को सामने लड़कर और जीतकर आते है तब ड़ॉ अंबेडकर ने जिस लोकतंत्र की कल्पना की थी वो सच होते हुए दिखाई देता है। इतनी कम उम्र में अपने क्षेत्र के लोगों के लिए आवाज बुलंद करना उनके हक़-अधिकारों के लिए लड़ना जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आप जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे यही हमारी मंगलकनाये है।

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