बीएमओ साहब के संरक्षण में चल रहा झोलाछाप डॉक्टर का खेल

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@Voice ऑफ झाबुआ       @Voice ऑफ झाबुआ

 

कहने को तो थांदला शहर को धर्म की कर्म की नगरी कहा जाता है और यहां कुछ समय से ऐसे अधिकारी भी आए हुए है की उन्होंने थांदला जैसी धर्म नगरी को कमाई की नगरी बना लिया ….आज थांदला शहर से लेकर पूरी तहसील में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है यह झोलाछाप डॉ लगातार आदिवासी समाज को इलाज के नाम पर लूट रहे है और यह सारा खेल सहकारी मुलाजिम बीएमओ साहब के संरक्षण में चल रहा है …इन लोगो की साहब से इतनी तगड़ी सेटिंग है कि इनका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता है और यह बेखोफ होकर अपना अवैध क्लिनिक चला सकते है …..खेर यह सब तो अब प्रशाशन के सामने है और जल्द ही अगले अंक में बीएमओ साहब का सारा काला चिट्ठा भी आपके सामने होगा ..?

 

झोलाछाप डॉक्टरों पर ‘मेहरबानी’ कार्रवाई से परहेज

शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों ने साधा मौन?

थांदला तहसील मुख्यालय सहित गांव-गांव में अवैध एवं झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकें बेधड़क संचालित हो रही हैं। इनकी शिकायतें भी जिम्मेदारों तक हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी इन पर अब तक मेहरबानी बनी हुई है। न तो झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही इनके विरूद्ध कोई कड़ा एक्शन लिया जा रहा है। यही कारण है कि इन डॉक्टरों की क्लीनिकों से मरीजों को दवाइयां भी उपलब्ध करवाई जा रही है, जबकि इसके लिए लाइसेंस जरूरी है।

अवैध कामो का गढ़ बना थांदला

यहां पर हर तरह के अवैध कार्य जमकर संचालित किए जा रहे हैं। इन्हीं अवैध कार्यों में झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकें भी शामिल हैं। ये डॉक्टर खुलेआम प्रशासन की आंखों के सामने बिना डिग्री एवं बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं। अब तो इन झोलाछाप डॉक्टरों ने अपने पास दवाइयां भी रखना शुरू कर दिया है, जबकि दवाइयां बिना लाइसेंस के नहीं रखी जा सकती है। इतना सब होने के बाद भी जिम्मेदारों ने पूरी तरह मौन साध रखा है।

विभाग के पास नहीं है नॉन डिग्रीधारी डॉक्टरों की जानकारी

जिले का स्वास्थ्य महकमा भी भगवान भरोसे ही चल रहा है। जिले में कितने नॉन डिग्रीधारी एवं अवैध डॉक्टर हैं, इसकी जानकारी भी विभाग के पास नहीं है। विभाग के पास यह डाटा भी नहीं है कि कार्रवाई कितने झोलाछाप डॉक्टरों पर हुई है। इतना सब होने के बाद भी झोलाछाप डॉक्टर जुगाड़ से अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं।थांदला तहसील मुख्यालय पर ही 70 से अधिक डॉक्टरों की क्लीनिकें चल रही हैं, जबकि तहसील के गांव-गांव में भी इनकी दुकानें हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि इन डॉक्टरों पर कार्रवाई को लेकर कई बार प्रयास किए गए, लेकिन उपर से प्रेशर आ जाता है।

आखिर क्यों है कार्यवाही से परहेज?

थांदला के मुख्य मार्ग सहित गलियों में इनकी क्लीनिकें संचालित हैं। इनके पास न तो डिग्री है और न ही कोई लाइसेंस, इसके बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं होना कहीं न कहीं प्रशासन एवं जिम्मेदारों की लापरवाही है।आखिर सबसे बड़ा सवाल है कि इन डॉक्टरों पर कार्रवाई से परहेज क्यों किया जा रहा है। इस संबंध में अधिकारी भी एक-दूसरे पर अपनी जिम्मेदारियां थोप रहे हैं।

 

थांदला में जिम्मेदार अधिकारियों ने वर्षोँ से झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। जिम्मेदारों को यह भी पता नहीं है कि यहां पर कितने नॉन डिग्रीधारी डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं।

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