अटेचमैन के नाम सीएचएमओ को कोन कर रहा गुमराह या लक्ष्मीयंत्र के आगे नतमस्तक साहब सालो से अटेचमैन के नाम जमे कई कर्मचारी मेघनगर से अटैच अभिषेक झाबुआ मै दर्ज करवा रहा अपना उपस्थिति

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अटेचमैन के नाम सीएचएमओ को कोन कर रहा गुमराह या लक्ष्मीयंत्र के आगे नतमस्तक साहब

सालो से अटेचमैन के नाम जमे कई कर्मचारी

मेघनगर से अटैच अभिषेक झाबुआ मै दर्ज करवा रहा अपना उपस्थिति

झाबुआ ओमप्रकाश राठौर

 

हमेशा सुर्खियों मै रहने वाला स्वास्थ विभाग में सरकारी पदों पर बैठे ओहदेदार शासन के नियमों का पालन कितनी संजीदगी से कराते हैं, जिला मुख्यालय पर कई कर्मचारी अटैच हैं, जबकि सरकार ने इस नियम को ही खत्म कर दिया है। कर्मचारियों के मूल स्थान पर नही जाने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसरों को इससे कोई सरोकार नहीं है। समझा जा सकता है कि लापरवाही किस हद तक चल रही है।
अटैचमेंट के इस खेल में बड़े साहब से लेकर निचले स्तर के कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने चहेतों को मनचाही जगह पर नियुक्ति करने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया है। जहां पिछले कई सालों से कई कर्मचारी जमे हुए हैं।इनकी नियुक्ति दूरदराज के गांव और उन स्थानों पर की गई थी, जहां सरकारी अमले की कमी है। इसके बाद भी कर्मचारी झाबुआ छोड़ने को तैयार नहीं है। विजय गणावा प्राथमिक स्वास्थ केंद्र रंभापुर तेजप्रकाश कहार सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पेटलावद अभिषेक तोमर संगणक सामुदायिक स्वास्थ केंद्र मेघनगर गोविंद राणावत प्राथमिक स्वास्थ केंद्र झकनावद मुकेश किराड सामुदायिक स्वास्थ केंद्र राणापुर अपनी मूल पदस्थापन पर जाने के निर्देश है नियमों का हवाला देकर जब भी कोई अधिकारियों से इनकी शिकायत करता है तो वे इनकी जरूरत बताकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। उनकी मानें तो जिले में सरकारी कर्मचारियों की कमी हैं, जिसके कारण यह व्यवस्था लागू की गई है। जानकार बताते हैं कि अटैचमेंट की आड़ में वसूली का यह खेल सालों से चल रहा है। गंभीर बात यह कि सब कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में है, जिसके बाद व्यवस्था सुधारकर नियमों को दुरुस्त करने की ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
सरकारी अधिकारियों ने सालभर पहले विभागों के काम में दिक्कत होने की शिकायतों के बाद अटैचमेंट की व्यवस्था खत्म कर दी थी। मंशा यह कि जिस अधिकारी को जहां नियुक्ति दी गई वह वहां जाकर वह अपना मूल काम संभाले। मौके की तस्वीर इसके उलट है। स्वास्थ विभागों में कर्मचारियों की कमी जस की तस बनी है और मुख्यालय में बैठकर कर्मचारी मौज कर रहे हैं।

सुचना के अधिकार मै अटैच कर्मचारियों की जानकारी नही दी गई

सरकारी कार्य में पारदर्शिता लाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों को सरकारी काम काज की निगरानी का अधिकार देने के लिए बनाया गया सूचना का अधिकार अधिनियम अब सरकारी कार्यालयों में मखौल बनकर रह गया है। ऐसे आवेदनों को जहां अधिकारी तवज्जो नहीं दे रहे हैं, वहीं नागरिकों को सूचना पाने के लिए जोर लगाना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय झाबुआ में एक आवेदक ने आवेदन करते हुए कितने कर्मचारी अटेचमैन है लेकिन मुख्य चिकित्सा स्वास्थ कार्यलय के कर्मचारियों ने सूचना के अधिकार मै जानकारी नही दी कई कर्मचारी सालो से अटेचकर रखे है जिसकी जानकारी नही दी गई इससे साफ पता चलता है की दाल पूरी ही काली है अब ये जांच का विषय है आखिर क्यों अटैच की जानकारी छुपाई गई

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