नगर में आज ईद- ईदु-उल- अजहा मुस्लिम समाज ने सादगी से मनाई

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बड़ी खट्टाली मुस्लिम समाज के लोगों ने  आज रविवार को ईदु उल अज़हा (बकरा ईद) सादगी के साथ विशेष नमाज़ अदा कर एवं खुतबे का वाचन किया। ईदु उल अजहा की नमाज के पूर्व इमाम सनाउल्लाह साहब ने नमाज का तौर-तरीका, नमाज का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि कुर्बानी के तबर्रुक के तीन हिस्से होते हैं। एक हिस्सा गरीब मिस्किन जिनका कोई नहीं होता उन्हें प्रदान किया जाता है, दूसरा हिस्सा अपने रिश्तेदारों व पड़ोसियों में बांटा जाता है, और तीसरा हिस्सा परिवार का होता है। नमाज के बाद सभी ने एक-दूसरे को गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी और घर जाकर कुर्बानी की रस्म अदा की।इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, ईदु उल अजहा का पर्व 12वें महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है और रमजान महीने के खत्म होने के 70 दिन बाद ईद उल अजहा आता हैं। इस बार 10 जुलाई को ये पर्व है। ईद उल अजहा को बकरीद के पर्व के नाम से भी जाना जाता हैं। ये कुर्बानी का दिन है। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। इस्लाम धर्म का यह दूसरा सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। आज लोग नमाज़ अदा करने के बाद एक दूसरे से गले लग कर शुभकामनाएं देते हैं।लोग अपने दोस्तों, परिजनों के घर जाते हैं। आज ईदु-उल अजहा यानी बकरीद के पाक मौके पर परिजनों, दोस्तों को खास बधाई संदेशों के जरिए मुबारकबाद दीजिए।

किन लोगों पर कुर्बानी फर्ज है
अगर किसी शख़्स पर कुर्बानी जायज है, लेकिन वह नहीं कराता है, तो यह बहुत बड़ा गुनाह है। इस्लामिक नज़रिए से हर ऐसा शख़्स जिसकी सालाना नेट सेविंग इतनी है, जिससे साढ़े 52 तोला ( एक तोला=10 ग्राम) चांदी खरीदी जा सके, उसके लिए कुर्बानी कराना अनिवार्य है।

ईद को लेकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। ईदी के रूप में मिलने वालें पैसे व उपहार को लेकर बच्चे काफी खुश नजर आए।इस मौके पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह से मुस्तेद रहा। राजस्व विभाग से ग्राम पटवारी नितेश अलावा तथा ग्राम पंचायत सचिव कृष्णकांत राठौड़, व पुलिस विभाग से चौकि प्रभारी रणजीत सिंह मकवाना, सुरेंद्र सिंह सिसोदिया, व समस्त पुलिस कर्मीयो ने ईद के मौके  समाज जनो को ईद त्योहार की शुभकामनाएं

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