नेतागिरी करने की बजाय बच्चों को पढाओ मास्टर जी…! सिसौदिया मास्टर ने तो पिता का भी धर्म निभाया और कर्तव्य भी…!

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झाबुआ

  वाह…! नेतागिरी करने वाले मास्टरों… क्या कोई ईमान धर्म है कि नी… कोई क्या परेशान में है समझे बिना विरोध करने लग गए। नेतागिरी छोडों और शिक्षा के मंदिर में बच्चों को ज्ञान दो… जिसके लिए सरकार तनख्वाह भी दे रही है।
जी हां हम बात कर रहे है उन मास्टरों की जो विगत दिनों प्रभारी प्राचार्य सिसौदिया को निलंबित करने की कलेक्टर सोमेश मिश्रा से मांग कर रहे थे… मगर उन्हे ये नही पता सिसौदिया सर ने पिता धर्म भी निभाया और अपने कर्तव्य का निर्वहन भी किया। ये वो ही मास्टर है जो संगठन के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाते है और इन पर आती है तो संगठन के नाम पर प्रशासन पर दबाव बनाते है। ये इतने खुरापाती है कि अपने धंधों के लिए दुसरे मास्टर और मास्टरनियों के कंधों पर बंदुक रख चलाते है। संगठन तो एक बहाना है असल में इनका मकसद अपनी दुकानदारी चलाना है।
हाल ही में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न हुआ और इस पंचायत चुनाव में प्रभारी प्राचार्य सिसौदिया को भी कुछ जिम्मेदारी मिली… मगर अचानक से उनकी बेटी की तबियत खराब हो गई और उन्हे तुरंत अपनी बेटी के पास जाना पडा… अपने पिता का कर्तव्य निभाने के बाद वो तुरंत अपने कर्तव्य स्थल पहुंचे और चुनाव सामग्री वितरित की और 30 जुन को वे कलेक्टर साहब से भी मिले… सिसौदिया सर सेक्टर प्रभारी होने के नाते उन्हे 4 जगह चुनाव में निगरानी रखनी थी और चुनाव के दिन साढे 5 बजे के लगभग वो एसडीएम व तहसीलदार से भी मिले जो शांति पूर्ण चुनाव संपन्न करवाया। मगर चंद राजनिती करने वाले मास्टरों का कहना है कि उन्होने चुनाव में अपने कर्तव्य का निर्वहन नही किया। ऐसे में दुसरों की तरह उन्हे भी निलंबित करना चाहिए प्रशासन दोहरा व्यवहार कर रही है कह कर विरोध करने लगे। अब इन संगठन के नाम पर दुकानदारी करने वालों को कौन समझाये की प्रभारी प्राचार्य सिसौदिया ने अपने कर्तव्य का निर्वहन बखुबी किया तो प्रशासन उन्हे कैसे निलंबित कर सकती है। ऐसा लगता है ये संगठन के नाम पर राजनिती करने वाले मास्टरों को पिता का फर्ज नही मालुम है तभी तो जिले भर में ये बात आग की तरह गलियारों में चल रही है कि इन विरोध करने वाले मास्टरों के परिवारों की देख रेख शायद दुसरे ही कर रहे होंगे। इसलिए लोग कुछ ओर कहे मास्टरों नेतागीरी करने की बजाय बच्चों को पढ़ाओ!

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