सत्ता की सनक कहे या सिक्को की खनक…..

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@Voice ऑफ झाबुआ      @Voice ऑफ झाबुआ

ग्राम सरकार व जिला सरकार के लिए मतदाताओ ने अपनी मोहर लगाकर भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गजों को जहां जमीन दिखा दे तो जनपदों में भी परिणाम काफी उलटफेर रहा। अब जनपद व जिला पंचायत में दोनों ही दल अपने-अपने दम ठोक दावे कर रहे हैं। जयश अपने तीसरी शक्ति के रूप में उदय होकर विधानसभा चुनाव के पूर्व अपनी स्क्रिप्ट लिखने की तैयारी करे कांग्रेस व भाजपा की नींद उड़ाना शुरू कर दिया है। फिलहाल सारणीपन के बाद अगले सप्ताह के अंतिम दिनों में स्थिति पूर्णता स्पष्ठ होगी।

नगर परिषद मेघनगर पर सबका ध्यान

जिले में एकमात्र मेघनगर नगर परिषद में ही चुनाव होने से जिले के सभी राजनीतिक पंडितों मीडिया भावी जननायको की निगाहें नगर के 15 वार्डों व उसके बाद किसकी नगर सरकार बनती है उस पर टिकी है मेघनगर में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी के सामने निर्दलीय तो दोनों ही दलों के कुछ जमीनी वफादार भी टिकट नहीं मिलने से शिकस्त देने हेतु खड़े होकर नगर परिषद के समीकरण को जटिल बनाने पर आमादा है।

पैराशूट प्रत्याशी तो कहीं हिट विकेट सी स्थिति

भाजपा ने अपने नगर परिषद की निवर्तमान अध्यक्ष को वार्ड क्रमांक 1 से खड़ा कर उसके राजनीतिक भविष्य को पशोपेश में डाला तो कुछ वार्डों में जमीनी सघीय निष्ठा वालों को दरकिनार कर संगठन के कुछ स्वयंभू सिपेसालाहार हठधर्मिता से कुछ आयातित कुछ सप्लायर तो कुछ भूमाफिया शराब माफिया रत प्रत्याशियों उनके परिजन को टिकट दे दी ।चौराहों पर चर्चा के चटकारे लगाते हुए चांडाल चौकड़ी के चक्रव्यू चरम घीन्नी बनी नगर परिषद के टिकट वितरण चाय की चुस्कियों के साथ हर किसी की जुबां पर हैं। कांग्रेस में भी कुछ विधायकों के आगे पीछे दुम छल्लो की तरफ घूमने वाले तो कुछ भाजपा कांग्रेश के साथ-साथ मिल सप्लाई करने वाले टिकट पाने में आगे रहे अब ऐसी जन चर्चा है कि कई वार्ड में बागी बागड़ बन समीकरण बदल सकते हैं इतना ही नहीं 20 साल से एक नवयुवक जो कि संगठन के हर कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर आगे रहता था झंडे तोकने के साथ-साथ चुनाव प्रचार दरी बिछाना सब कुछ उसने पार्टी को अपनी मां मानकर किया व अपनी छोटी सी दुकान में कभी। महापुरूषो की पुण्यतिथि तो कभी जन्म जयंती मानाता रहा हर बार ऑन लाइन मीटिंग भी अपने कंप्यूटर और नेट बैलेंस से करवाता और चांडाल चोकड़ी को फ्री में चाय पिलाता रहा ऐसे श्रेष्ठ कार्यकर्ता को टिकट ना देकर उक्त चौकड़ी ने पार्टी की गाइडलाइन से भटक कर चंद सिक्के डकार कर टिकट वितरण कर दिया।

न जीतू तो क्या जितने भी नहीं दूंगा

कुछ वार्डों में चतुर्थ को कुछ में त्रिकोणीय संघर्ष भी देखने को मिल रहा है ना खाऊंगा ना खाने दूंगा की तर्ज पर टिकट नहीं मिलने व उपेक्षा से नाराज कुछ निर्दलीय इसी तर्ज पर चुनाव लड़ रहे हैं भले में नहीं जीतू पर इसे भी नहीं जितने दूंगा कुल मिलाकर इस चुनावी मेगा शो में मौजूदा पार्षद व सत्तापक्ष चुनाव लड़ रहे भावी पार्षदों को खो करने में मतदान कितने सफल रहते हैं यह भविष्य बताएगा किंतु फिलहाल तो उखडी सड़कें ,अनियमित पेयजल , सरकारी जमीनों का नामांतरण, पूर्व परिषद की सरकारी जमीनों के कोर्ट केश अरुचि , नगर परिषद में दल्लो की दखलअनदाजी, कोरोना काम मे उपजी परेशानी, अतिक्रमण पश्चात रोजगार के लिए पलायन मजदूरी छोटे उद्यमी आधा अधूरा बगीचा बीआरसी में खेल घोटाले में सप्लाई के साथ सेटिंग आदि मुख्य मुद्दे हैं।

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